यूपी में बीस फीसदी लोग शराब उपभोक्ता , देश में 16 करोड़

दिल्ली हो या मुम्बई, शाम होते ही शराब की दुकानों पर भीड़ दिखने लगती है। भारत में एक मुहावरा बहुत आम है कि दवा और दारू, दोनों की बिक्री समान रूप से होती है। बंगाल में दवा की दुकानें दारू की दुकानों से ज्यादा हैं तो गोवा में हर पांचवी या छठी दुकान शराब की है और दवा की दुकानें बेहद कम। उत्तर प्रदेश में दवा और दारू बराबर की बिकती है तो पंजाब में शाम को शराब की खपत खूब बढ़ जाती है। शराब की बिक्री और बढ़ती खपत पर हाल ही में एक सरकारी सर्वे आधारित रिपोर्ट सामने आई है जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग पांच करोड़ 70 लाख शराब पीने वाले  बेहद गंभीर किस्म के शराबी हैं। भारत की सवा सौ करोड़ की आबादी में लगभग 16 करोड़ लोग शराब के आदी हैं यानी कुल लगभग 14.6 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं। यूपी में सबसे अधिक लगभग 20 फीसदी लोग शराब पीते हैं।

ये संख्या अधिक भी हो सकती है, लेकिन ये सर्वेक्षण, जो 186 जिलों में 2 लाख 111 घरों पर आधारित है, नशीली दवाओं और शराब के दुरुपयोग की एक चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करता है और व्यक्तियों के स्वास्थ्य और उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर डाल रहा है। इस सर्वे में चार लाख 73 हजार 569 लोगों से बात चीत की गई। पहली बार शराब पीने वाली महिलाओं के भी आंकड़े इकट्ठे किए गए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या 27. 3 प्रतिशत है, इन आंकड़ों के अनुसार 6.4 महिलाएं शराब पीने की बुरी तरह से आदी हैं। इस सर्वे के मुताबिक महिला और पुरुषों के बीच शराब पीने का अनुपात 17: 1 है।

छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और पंजाब में पुरुष आबादी के आधे से अधिक लोग शराब पीते हैं। यूपी में सबसे अधिक 4.2 करोड़ लोग शराब पीते हैं, इस हिसाब से यूपी में लगभग 20 फीसदी लोग शराब पीते हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 1.4 करोड़ और मध्य प्रदेश में 1.2 करोड़ हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि 10 से 75 वर्ष की आयु वर्ग में अनुमानित 16 करोड़ शराब उपभोक्ता हैं, उनमें से 19 प्रतिशत शराब पर निर्भर हैं। ये आंकड़े दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच एकत्र किए गए।

चीयर्स डेस्क

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