यूपी में जल प्रदूषित करने वालों को मिलेगी सजा

गांधी जी की 150वीं जयंती पर आयोजित विशेष सत्र में जल शक्ति मंत्री डा. महेन्द्र सिंह ने कहा कि देश व प्रदेश में पेयजल की उपलब्धता बनाये रखने के लिए सरकार गंभीर है। इसके लिए सरकार जल्द ही नया कानून लाएगी जिसमें नदियों व तालाबों को प्रदूषित करने वालों को 5 से 7 सात साल तक की सजा और 10 से 20 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान होगा।

विशेष सत्र के दौरान उन्होने वाटर हाव्रेस्टिंग के प्रति लोगों को जागरुक किये जाने पर बल देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में सभी विद्यालयों, बहुमंजिले भवनों व सरकारी कार्यालयों में वाटर हाव्रेस्टिंग अनिवार्य किया जायेगा। उन विद्यालयों को तब तक मान्यता नहीं दी जायेगी, जब तक वे वाटर हाव्रेस्टिंग की व्यवस्था नहीं कर लेंगे। श्री सिंह ने कहा कि कुछ लोग नदियों व अन्य जल श्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। पशुओं को काटकर नदियों व तालाबों में डाल दिया जाता है। कुछ फैक्ट्रियां भी अपने केमिकल सीधे नदियों, नहरों व तालाबों में डाल देते हैं। इससे जल प्रदूषित होता है जो मानव व पशु दोनों के लिए खतरनाक होता है।

गांधी जी 1902 में वाराणसी आये थे, वहां की सकरी गलियों से होकर काशी विश्वनाथ जी का दर्शन किया था। उन्होंने तभी सपना देखा था कि यह गलियां चौड़ी होनी चाहिए। अब हमारी सरकार ने वह व्यवस्था कर दी है कि काशी विश्वनाथ का दर्शन सीधे गंगा में स्नान करके किया जा सकता है। इसी तरह गांधी जी 1915 में हरिद्वार गये और वहां कुंभ की दुर्दशा देखकर सपना देखे थे कि काश यह बेहतर होता। गांधी के सपनों को मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में आयोजित कुंभ में साकार किया, जिसमें 24 करोड़ लोगों ने भाग लिया था। इसी क्रम में राज्य मंत्री स्वाती सिंह, विधायक सुशील सिंह, बुलन्दशहर के डिबाई की विधायक डा. अनिता लोधी और विधायक सुनील वर्मा ने अपने-अपने क्षेत्रों व विधान सभा की समस्याओं से अवगत कराया।

चीयर्स डेस्क 

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