यूपी में ग्रामीण पेयजल योजनाओं की रफ्तार सुस्त

यूपी में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी को फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए लागू की गईं ग्रामीण पेयजल योजनाओं की रफ्तार सुस्त है। इसके लिए सपा शासनकाल से भाजपा सरकार तक शुरू की गईं 3101 परियोजनाओं में से 1459 ही पूरी हो पाई हैं। इससे 6411 बस्तियों की 65.30 लाख आबादी को पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराया गया है। वहीं, 1642 योजनाओं के अधूरी रहने से 8067 बस्तियों की 76.57 लाख आबादी को अभी तक लाभ नहीं मिल पाया है। इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों नीर निर्मल परियोजना की हुई समीक्षा बैठक में नाराजगी भी जताई थी।

नीर निर्मल परियोजना के प्रथम चरण में प्रयागगाज, बहराइच, बलिया, बस्ती, देवरिया, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर और कुशीनगर में 233 परियोजनाओं में 224 पूरी हो गई है, लेकिन अभी तक 7 ही विभाग को सौंपी गई है। द्वितीय चरण में प्रयागगाज, बहराइच, बलिया, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, कुशीनगर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र और वाराणसी में 379 परियोजनाएं स्वीकृत की गई है। करीब 263 करोड़ 28 लाख 44 हजार की लागत से 367 पर काम शुरू हुआ।

पाइप पेयजल परियोजना में काफी पीछे

पाइप पेयजल योजनाओं में उत्तर प्रदेश काफी पीछे है। राष्ट्रीय औसत 18.33 है जबकि प्रदेश में 2 करोड़ 58 लाख 8। हजार 064 ग्रामीण परिवारों में से मात्र 3 लाख 45 हजार 452 (1.33 प्रतिशत) के घरों में नल कनेक्शन दिया गया है। वहीं, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और सिक्किम में 50 से 99 प्रतिशत कनेक्शन दिए गए हैं।

चीयर्स डेस्क 

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