शराब बिक्री में 700 करोड़ का घाटा, अयोध्या फैसले के कारण

अयोध्या का ऐतिहासिक फैसला आ चुका है। रामजन्मभूमि को केन्द्र के अधीन कर, तीन माह के अन्दर एक ट्रस्ट बना कर जमीन को रामलला को देने का फैसला किया गया है तथा मुसलिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन कहीं और देने को का भी आदेश दिया गया है। किसी प्रकार की अप्रिय घटना ना हो इसके लिए यूपी सरकार ने प्रदेश के सभी शराब के ठेकों को दो दिन के लिए बंद करने का फैसला लिया था। यूपी सरकार के राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा आबकारी विभाग से ही आता है। फैसला शनिवार को आने की वजह से शनिवार और रविवार को शराब की दुकान बंद होने से करोड़ों का नुकसान हुआ है।

यूपी लिकर एसोशिएशन के अध्यक्ष कन्हैया लाल मोर्या के मुताबिक, प्रदेश सरकार हम से साल भर का दुकान का किराया वसूल करती है। उसके बाद भी साल में कई बार इस प्रकार से अघोषित बंदी कर दी जाती है। जिससे शराब के दुकानदारों को करोड़ों का नुकसान होता है।

मौर्या जी ने आगे बताया कि अयोध्या प्रकरण में प्रशासन के बिना किसी पूर्व सूचना के दुकानें बन्द करने का आदेश दे दिया था। आम दिनों में जहां इस तरह की बंदी से 5 करोड़ रूपए का नुकसान प्रतिदिन का होता है लेकिन इस बार शनिवार व रविवार को बंदी होने की वजह से यह आकंडा 6 करोड़ रूपए प्रतिदिन का हो गया। इस तरह से 2 दिन में लगभग 12 करोड़ रूपए प्रति जिले के नुकसान का अनुमान है।

अवैध शराब विक्रेताओं की चांदी

छोटी छोटी बंदी होने से शराब उपभोक्ता कहीं से और किसी भी कीमत पर शराब खरीदनें को तैयार हो जाता हैं। बंदी के दिन जहां शराब ज्यादा दाम पर मिलती है वहीं शराब के नकली होने की संभावना भी होती है।

पूरे यूपी में बंद थी दुकानें

अयोध्या मामले कि गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे यूपी में शराब बंदी का निर्णय लिया था। जिससे शराब एसोसिएशन के महामंत्री कन्हैया लाल मौर्या के मुताबिक 700 करोड़ रूपए का नुकासान हुआ है।

चीयर्स डेस्क 

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