यूपी के गावों में हैंडपंपों का पानी हुआ विषैला

यूपी के बरेली जिले के मीरगंज और आंवला क्षेत्र के कैंसर प्रभावित करीब दो दर्जन गांवों में हैंडपंपों का पानी पीने पर रोक लगा दी गई है। सीडीओ ने कैंसर प्रभावित गांवों के लोगों से हैंडपंपों का पानी न पीने के लिए शपथ पत्र लेने के निर्देश डीपीआरओ को दिए हैं। इन गांवों में लोगों को विश्वास में लेकर हैंडपंपों के हत्थे निकाले जा रहे हैं।

आर्सेनिक उगलने वाले हैंडपंपों पर प्रशासन द्वारा लाल निशान लगा दिया है। प्रशासन ने इन हैंडपंपों पर लाल निशान लगाकर छोड़ दिया था। पूर्व में अपने गांव के दूषित जल को लेकर कई बार ग्रामीणों ने अफसरों से शिकायत की थी मगर कार्रवाई कुछ नहीं हुई।

मीरगंज के विधायक डीसी वर्मा ने मानसून सत्र में कैंसर प्रभावित गांवों का मामला विधानसभा में उठाया था। पिछले हफ्ते प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा की समीक्षा बैठक में विधायक ने कैंसर से जूझते ग्रामीणों की दिक्कतें बताई। मंत्री ने जरूरी कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद प्रभावित गांवों में उथले हैंडपंपों के पानी पीने पर पाबंदी लगा दी गई है। पानी की जांच शुरू कर दी गई है।

रामगंगा नदी के खादर के किनारे बसे गांवों में कैंसर महामारी में तब्दील होता जा रहा है। नदी के जहरीले पानी के कारण इन गांवों के भूजल बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है। जल निगम की जांच में प्रभावित गांवों के हैंडपंपों के पानी आर्सेनिक और फ्लोराइड की पुष्टि हो चुकी है।

जल निगम के एक्सईन संजय कुमार का कहना है कि मीरगंज क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में हैंडपंपों के पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा है। हैंडपंपों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक होने की आशंका है। ग्रामीणों से हैंडपंप का पानी नहीं पीने को कहा गया है।

चीयर्स डेस्क 

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