मौत के जाम तैयार करने वाले धरे गए

यूपी के बाराबंकी जनपद में पिछले दिनों जहरीली शराब पीने से 30 मौतें हो गई थीं, जिससे पुलिस और आबकारी विभाग पर शराब बिकवाने का गम्भीर आरोप लगा था। अपने ऊपर लगे आरोपों से बनी छवि को निर्मूल साबित करने के लिए पुलिस और आबकारी की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लाखों रुपये की एक हजार पेटी शराब की जखीरा बरामद किया। यह शराब हरियाणा से लाकर बाराबंकी से कई राज्यों में सप्लाई की जाती थी। बाराबंकी पुलिस और आबकारी विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से शराब माफियाओं में हड़कम्प मच गया है।

जिले की कोतवाली नगर पुलिस ने बड़ेल के पास एक गोदाम पर ट्राला से उतारी जा रही 950 पेटी देशी और अंग्रेजी शराब बरामद की है। इन शराब की बोतलों पर रैपर और बार कोड नदारद थे। यहां पर शराब को रीपैक करके बाराबंकी और आसपास के जिलों में खपाए जाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने मौके से चार लोगों को हिरासत में लिया है। साथ ही यह शराब मंगवाने वाले गल्लामंडी और आवास विकास कॉलोनी निवासी रूपेश जायसवाल और गुड्डू सिंह की तलाश की जा रही है।

बरामद शराब को स्थानीय ब्रैंड की शीशियों में पैक कर बेचे जाने की आशंका है। गैंग के फरार सदस्यों और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। शराब में घातक पदार्थ मिलाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोतवाली नगर पुलिस को वारदात में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। –आरएस गौतम, एएसपी नॉर्थ, बाराबंकी

कोतवाली नगर के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार रघुवंशी के मुताबिक शनिवार की रात सूचना मिली की बाईपास रोड के समीप बड़ेल के एक गोदाम में ट्राला से गुपचुप ढंग से शराब उतारी जा रही है। इस पर छापेमारी कर ट्राला चालक सुशील गुप्ता, सतरिख के करोरा निवासी सजीवन, कोठी के जटहापट्टी के नीरज कुमार, असंद्रा के ममरखापुर के धीरज कुमार को पकड़ लिया गया। गोदाम पर लाए गए हरियाणा रजिस्ट्रेशन नंबर के ट्राला से बिना रैपर और बार कोड की शीशी और बोतल में पैक शराब उतारी जा रही थी। एसपी आकाश तोमर ने बताया कि बरामद शराब से जुड़े सभी तस्करों और उनकी गतिविधियों की जानकारी एकत्र की जा रही है। फरार गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए सीओ सिटी सुशील कुमार सिंह के नेतृत्व में तीन टीमें गठित की गई हैं।

जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बरामद 950 पेटी शराब की अधिकांश बोतलें और पव्वा में डिस्टलरी और ब्रैंड का रैपर नहीं लगा है। इसके सीधे डिस्टलरी से यहां पर लाए जाने की संभावना है। बरामद शराब में करीब 90 प्रतिशत देशी है। उन्होंने बताया कि बरामद देशी शराब की शीशियां चपटी हैं, जबकि बाराबंकी के सरकारी ठेके पर गोल शीशी में शराब की बिक्री होती है। कुछ शीशियों में ब्रैंड के रैपर और निर्माण डिस्टलरी का जिक्र है। इसके अनुसार यह अरुणाचल प्रदेश और हरियाणा की शराब है। ऐसे में ज्यादा संभावना है कि यहां के गोदाम पर ही तस्कर इस शराब को स्थानीय बिक्री में प्रयोग होने वाले ब्रैंड की शीशी में रीपैक करते। फिर आपूर्ति वाले जिले में प्रचलित ब्रैंड की शराब का रैपर लगाते।

दो माह पहले ही रामनगर के रानीगंज के ठेके से बेची गई देशी शराब को पीकर 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में पुलिस और आबकारी के कई अफसर निलंबित हो चुके हैं। पर दो माह के अंतराल में ही इस नकली शराब के जखीरे के बरामद होने से धंधे की जिले में गहरी जड़ों का पता चलता है।

चीयर्स डेस्क

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