‘मेन विल बी मेन….’ नहीं है जादू

इम्पीरियल ब्लू व्हिस्की इसी श्रेणी की अन्य प्रकार की व्हिस्की में स्मूथ है, यानी कि पीने में मुंह को खराब नहीं करती है। इसकी दूसरी विशेषता इसका स्वाद और स्मेल है, यह भी इसी श्रेणी की दूसरी शराब से बेहतर है, बल्कि अच्छी है। इसके अलावा इसका कलर और बोतल भी काफी प्रभावशाली है। इसकी पैकेजिंग में रिचनेस दिखती है और कई शराब उपभोक्ता इसे इस कारण भी खरीद कर पीते हैं कि यह देखने और पीने में अच्छी है।

Image result for imperial blue whiskyइसकी निर्माता कंपनी चूंकि पिछले काफी समय से पूरे भारत के प्रमुख शहरों में अच्छा व्यवसाय कर रही है इसलिए इसकी क्वालिटी पर भी उसे स्वाभाविक रूप से ध्यान देना पड़ रहा है। हालांकि निर्माता कंपनी के सीनियर अधिकारी इस व्हिस्की के मार्केट पकड़ लेने का सारा श्रेय इसकी कैम्पेन ’मेन विल भी मेन….’ को देते हैं, इस कैम्पेन की फिल्म 2011 में आई। हालांकि इसे कम ही दिखाया जा सका क्योंकि शराब उत्पादों का विज्ञापन प्रतिबंधित है। कंपनी के अधिकारी कहते हैं कि इसी कैम्पेन के कारण यह आम उपभोक्ता के दिलो दिमाग पर छा गई है, लेकन वास्तविकता कुछ और है।

1997 में भारत के बाजारों में लांच की गई इम्पीरियल ब्लू के निर्माण में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है वह अत्याधुनिक है और इसकी स्मूथनेस का राज़ भी यही है। इसका बाटलिंग प्लांब चूंकि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में है और वहां पानी की स्थितियां ठीक नहीं है। उत्तर भारत के मुकाबले दो गुनी से अधिक बोरिंग से निकलने वाला पानी भारी नहीं है और उसका स्वाद भी ठीक है। लेकिन पानी की मात्रा कम है। इसी कारण इसकी निर्माता कंपनी ने स्वयं वाटर प्लांट लगाया है और इसके डिस्टिलाइजेशन के लिए जर्मनी की तकनीक का प्रयोग किया जा रहा हैै। इसके निर्माण में प्रयोग किए जाने वाले पानी की शुद्धता का भी ध्यान रखा जाता है।

इस व्हिस्की के लिए प्रयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थ और फल चूंकि महाराष्ट्र के होते हैं तो स्वाभाविक है कि टमाटर का प्रयोग अधिक होता है और इसी कारण इसके स्वाद में हल्का सा मीठा पन होता है। लेकिन इस सब के बावजूद इसमें भी एथनॉल मिक्सचर और वाटर बबल्स का जो अनुपात होना चाहिए, वह नहीं है। कम है, इसको अधिक समय दरकार है और अच्छा बनाने के लिए। लेकिन आधे से दो प्रतिशत तक कम ब्वायलिंग करने से इसमें भी तेज हिट करने और नशीला स्ट्रोक मारने की क्षमता पैदा हो जाती है।

इम्पीरियल ब्लू पीने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि जब इसे पीना शुरु करो तो यह बहुत अच्छी लगती है, एक दो पैग तो बहुत मज़ा देते हैं लेकिन तीसरा पैग अचानक हिट करने का एहसास कराता है। सीने पर भारी पन पैदा कर एकदम दिमाग को जाम जैसा कर देता है। इसमें अल्कोहल की तीव्रता वैसे तो 42 .8 घोषित की गई है लेकिन अचानक तेज़ हिट स्ट्रोक से लगता है कि इसमें कुछ ज्यादा ही अल्कोहल मिला हुआ है। इसके साथ ही इसमें एक और जो ऐसा विशेष तत्व मिला होता है जो इसके अधिक मात्रा में नियमित सेवन से जल्दी ही आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पैदा करने में सहायक होता है। यह तत्व या अवयव आम तौर पर निम्न श्रेणी की हर व्हिस्की में मिला होता है लेकिन चूंकि इम्पीरियल ब्लू की निर्माता कंपनी एक जानी मानी कंपनी है तो उससे उम्मीद नहीं की जाती है कि वह भी अपने निम्नतम ब्रांड में इस प्रकार के तत्व मिलाएगी।

चीयर्स डेस्क

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