मुफ्त पानी योजना पर NGT खफा

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने  दिल्ली सरकार के 20 हजार लीटर मुफ्त पीने का पानी देने की योजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एनजीटी ने कहा है कि पानी मुफ्त मिलने की वजह से ही दिल्ली में इसका दुरुपयोग हो रहा है।  एनजीटी ने पीने के पानी के दुरुपयोग के चलते सरकारी फंड को नुकसान की भी बात कही। कोर्ट का यह आदेश दिल्ली में लगातार गिर रहे भूजल स्तर को लेकर है।

एनजीटी ने भूजल स्तर गिरने की वजह और उनके समाधान को लेकर कुछ समय पहले एक कमेटी का भी गठन किया था, उस कमेटी ने एनजीटी को बताया है कि दिल्ली में तकरीबन 17062 अवैध बोरवेल है।  कमेटी की ये रिपोर्ट मई 2019 तक की है, कमेटी ने यह भी बताया है अवैध रूप से लगातार जमीन से पानी खींचने की वजह से दिल्ली एनसीआर में पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है साथ ही पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।  कमेटी ने सुझाया है कि अवैध रूप से चल रहे बोरवेल को रोकने के लिए 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

कमेटी से आई इस रिपोर्ट के बाद भूजल स्तर के गिरने को लेकर एनजीटी ने कई सुनवाई की, एनजीटी के मुताबिक पीने के पानी का दुरुपयोग भी दिल्ली में काफी बढ़ गया है, क्योंकि दिल्ली में लोगों को मुफ्त पानी मिल रहा है।  एनजीटी ने कहा कि मुफ्त में 20000 लीटर पानी को लोग व्यर्थ बर्बाद कर रहे हैं क्योंकि उन्हें उसकी कीमत नहीं चुकानी पड़ रही है।  इसमें सरकार का धन भी खर्च हो रहा है।  एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह पीने लायक पानी की बर्बादी को बचाने का समाधान खोजें।

दिल्ली जल बोर्ड को एनजीटी ने इस मामले में एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है, ताकि अवैध रूप से चल रहे बोरवेल को दिल्ली में रोकना संभव हो सके।  एनजीटी ने पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे 400 बोरवेल को लेकर भी चीफ सेक्रेटरी को मामले को देखने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने फिलहाल कमेटी को निर्देश दिया है कि 1 नवंबर में अपनी दूसरी रिपोर्ट भी कोर्ट के सामने रखे, जिससे साफ हो सके कि 2019 में दिल्ली में अवैध बोरवेल की कुल संख्या कितनी है, और इस पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड क्या-क्या सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
चीयर्स डेस्क 
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