महुआ के लड्डू से लगा दी शराब पर रोक

देशी शराब के नशेड़ियों की लत छुड़ानेे के लिए झारखंड के चतरा जिले के गिद्धौर प्रखंड में दो गांवों की महिलाओं ने नई पहल की है। शराब बनाने के लिए बाजार में महुआ उपलब्ध न रहे इसलिए इसे खरीदे ले रही है और इस महुआ से वह लड्डू बना रही हैं और बाजार में पांच रुपए प्रति लड्डू बेच रही हैं। इसके पीछे महिलाओं का दावा है कि जब पूरे जिले में महुआ ही नहीं मिलेगा तो न इसकी शराब बनेगी और न ग्रामीण पी पाएंगे साथ ही महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी और जीवनस्तर में सुधार होगा।

महुआ वाली शराब भी जल्द छा सकती है बाजार में

मसूरिया और गिद्धौर गांव की 60 महिलाओं ने ग्रामीणों को नशामुक्त बनाने का अभियान शुरू किया है। सभी आठ महिला समूहों से जुड़ी हैं। वे दूसरे गांव की महिलाओं को भी महुआ से लड्डू बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। स्वयंसेवी संस्था अखंड ज्योति ने नाबार्ड के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। ग्रुप से जुड़ी महिलाओं के अनुसार, अभी दो गांवों में यह पहल की गई है। महिलाओं का समूह जिला में होनेवाली महुआ की उपज खरीद लेगा।

एक किलो में 35 लड्डू

इस कारोबार से जुड़ीं ललिता देवी के अनुसार, दो गांवों की महिलाएं महुआ के 2000 लड्डू बनाती हैं। होटलों और दुकानों में पांच रुपए पीस बेचती हैं। हर दिन लड्डू बेचकर 10 हजार रुपए मिलते हैं। एक किलो महुआ से 35 लड्डू बनते हैं। 2000 लड्डू बनाने में 57 से 60 किलो महुआ की जरूरत होती है।

लखनऊ में ही नहीं रोका जा पा रहा अवैध शराब का कारोबार

महिलाएं 25 से 28 रुपए किलो महुआ खरीदती हैं। 28-30 ग्राम महुआ एक लड्डू में लगता है। यानी, एक लड्डू बनाने में 71 पैसे का महुआ और अन्य सामग्री की लागत मिलाकर कुल तीन से साढ़े तीन रुपए खर्च होते हैं। इस तरह 2000 लड्डू बनाने में छह से सात हजार रुपए की खर्च आती है। हर दिन तीन से चार हजार रुपए का फायदा होता है।

ऐसे बनता है लड्डू

सबसे पहले महुआ को पानी में फुलाया जाता है। इसके बाद उसे सुखाकर घी में तला जाता है। तले महुआ में तीसी, ड्राई फूड, सौंप, ईलायची व गुड़ मिलाकर ओखली में कूटा जाता है। इसके बाद लड्डू बनाया जाता है। दुकानों में बढ़ती डिमांड को देखते हुए महिलाओं के ग्रुप ने काम का बंटवारा कर दिया है। कुछ महिलाएं लड्डू बनाती हैं तो कुछ मार्केटिंग का काम संभालती हैं। ग्रामीण रात में जंगल चले जाते हैं और सुबह तक चुनते हैं। इसे सुखाकर 25 से 30 रुपए प्रतिकिलो बेचा जाता है। महुआ बेचकर ग्रामीणों का चार महीने का घर खर्च निकल जाता है। यहां के महुआ की डिमांड गया, पटना सहित अन्य जिलों में है। अब महिलाओं का ग्रुप ऐसे ग्रामीणों से महुआ खरीदकर लड्डू बनाने का फैसला लिया है।

चियर्स डेस्क

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