महज दो रुपए में एक लीटर शुद्ध पानी

यदि आप किसी बेहद पिछड़े गांव में हैं, या फिर किसी ऐसी जगह पर रहते हैं जहाँ पीने का शुद्ध पानी मयस्सर नहीं है तो फिक्र न करें। टी-बैग नुमा क्लियर बॉटल यानी छोटा पैकेट है न। एक लीटर पानी में पैकेट घुमाते ही अशुद्धियां खत्म और आप बेफिक्र होकर प्यास बुझाएं। आइआइटी कानपुर ने एक ऐसा छोटा पैकेट तैयार किया है जो आंखों से न दिखने वाले पानी में घुलनशील क्रोमियम, निकिल व कॉपर जैसी भारी धातुओं को पलक झपकते ही खत्म कर देगा। एक लीटर पानी साफ करने का खर्च महज दो रुपये आएगा।

मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान यूएसए के साथ मिलकर आइआइटी के अर्थ साइंस विभाग के प्रो. इंद्रसेन ने पानी शुद्ध करने वाला यह बैग बनाया है। छह माह शोध के बाद तैयार हुए इस स्माल बैग का परीक्षण पूरा हो चुका है। आइआइटी की प्रयोगशाला के बाद शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप, नल व जमीन के अंदर से निकाले जाने वाले पानी में इसका परीक्षण किया गया। करीब महीने भर तक किए गए परीक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

जैविक पदार्थो से किया तैयार

प्रो. इंद्रसेन ने बताया कि पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए बनाए गए इस बैग में केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। जैविक पदाथोर्ं से बनाया गया बैग प्राकृतिक तरीके से पानी साफ कर उसके अंदर जरूरी तत्वों को हानि नहीं पहुंचाता। इससे पानी के स्वाद में भी कोई फर्क नहीं आता है। हालांकि पेटेंट न होने की वजह से उन्होंने जैविक पदाथोर्ं के नाम नहीं बताए।

छह महीने में आम आदमी तक पहुंच जाएगा यह पैकेट 

आइआइटी में बनाया गया पानी शुद्ध करने का यह छोटा पैकेट छह माह में आम आदमी तक पहुंच सकता है। प्रो. इंद्रसेन ने बताया कि इसकी कीमत कम होने के कारण यह सभी की पहुंच में होगा। लोग इस सस्ती तकनीक से अपने घर में पीने का पानी शुद्ध कर सकेंगे।

 चीयर्स डेस्क 

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