मध्य प्रदेश में दस फीसद मंहगी हो सकती है शराब

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार क्या बनी, शराब उपभोक्ताओं के लिए दिक्कत शुरु हो गई। अप्रैल से शराब आठ से दस फीसदी महंगी हो सकती है। सरकार ने अब शराब के ठेके 15 फीसदी ज्यादा दरों पर देने का फैसला किया है। मध्य प्रदेश सरकार को अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू करनी है, लेकिन लोकसभा चुनाव की वजह से इसे लागू करने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए फिलहाल नीति में आंशिक संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।

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मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए जो मसौदा तैयार किया है, सूत्रों के अनुसार मौजूदा ठेकों को 15 प्रतिशत ज्यादा कीमत पर तीन महीने के लिए ही देगी। जो ठेकेदार प्रस्तावित नई बढ़ी हुई दरें देने को तैयार नहीं होंगे, उन ठेकों की तीन महीने के लिए नीलामी की जाएगी। जुलाई से बाकायदा ये नई नीति लागू कर दी जाएगी। सूत्र कहते हैं कि आबकारी विभाग ने इस प्रकार का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अगली कैबिनेट में इसे मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।

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शराब के ठेके महंगे उठेंगे तो जाहिर है कि शराब महंगी होगी। एक अनुमान के अनुसार दस फीसदी दामों के बढ़ने की उम्मीद है। नई व्यवस्था से शराब के दामों के साथ ही राज्य सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। मध्य प्रदेश शासन के उच्च अधिकारियों का मानना है कि नई आबकारी नीति लागू होने से चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। जबकि हालत ये है कि पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी सरकार 9000 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी।

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सूत्रों का कहना है कि जुलाई में बचे हुए वित्तीय वर्ष के लिए अलग से एक नीति लाई जाएगी। इसमें सभी ठेकों के लाइसेंस की नीलामी की जाएगी। करीब 70 फीसदी ठेकेदार मौजूदा लाइसेंस को 15 फीसदी ज्यादा दर पर रिन्यू कराने के लिए तैयार हो गए हैं। बाकी बचे 30 फीसदी ठेकों की नीलामी की जाएगी। उधर इंदौर से लेकर भोपाल तक, अधिकांश शराब उपभोक्ताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति उनके हितों के वितरीत है।

चीयर्स डेस्क

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