मंदी के आगे नतमस्तक मधुशाला

शराब की बिक्री पर कभी उसके दाम बढ़ने से फर्क नहीं पड़ता था लेकिन इस बार की मंदी ने शराब व्यापारियों की भी नींद हराम कर दी अंग्रेजी शराब विक्रेताओं की सब से बुरी हालत है।   मंदी का ही असर है कि हमेशा भरे रहने वाले मयखानों में भीड़ कम होने लगी है। कारोबारियों का कहना है की दुकानों से जहां शराब और बीयर की रोजाना की बिक्री 20 से 25% घटी है, वहीं मॉडल शाप और बार की रोजाना की बिक्री पर लगभग  40% तक का असर दिखाई दे रहा है। यह मंदी कारोबारियों सिर्फ कारोबारियों के लिए ही है ,  सरकारी खजाने पर इसका फिलहाल तो कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार पर इस मंदी का कोई असर नहीं होगा। क्योंकि देसी शराब में कोटा तय है और ठेकेदार को तय कोटा उठाना ही पड़ रहा है। इसी तरह अंग्रेजी और बीयर के दुकानदारों के लिए भी सरकार ने बिक्री का लक्ष्य तय कर रखा है। उससे कम शराब की उठान होने पर लाइसेंस नवीनीकरण पर असर पड़ेगा। इसके चलते शराब की उठान तो हो रही है, लेकिन बिक्री न होने से माल दुकानों पर डंप हो रहा है।        कन्हैया लाल मौर्य, महामंत्री, उत्तर प्रदेश शराब असोसिएशन

अछूते नहीं बीयर के दुकानदार 

बीयर की दुकान चलाने वाले दुकानदारों की मानें तो उमस भरी गर्मी में बीयर की बिक्री सबसे अधिक होती है। हालांकि, इस समय सीजन के बावजूद बीयर की रोजाना की बिक्री में 20 फीसदी की कमी हुई है। रकाबगंज के शराब कारोबारी महेंद्र जायसवाल भी बीयर की बिक्री में 18 से 20 फीसदी की कमी बताते हैं। महेंद्र की मानें तो बीयर और शराब की बिक्री में यह कमी 15 सितंबर के बाद और बढ़ेगी। 15 के बाद मंदी के साथ कारोबार पर पितृपक्ष और फिर नवरात्र का भी असर दिखेगा।

सबसे बुरी हालत अंग्रेजी शराब विक्रेताओं की है। ठेकेदारों की मानें तो जिस दुकान से दिन में एक लाख रुपये का माल बिकता था, वहां महज 70 हजार रुपये की सेल हो रही है। अंग्रेजी शराब दुकान के ठेकेदार नीरज जायसवाल बताते हैं कि मंदी के चलते दुकान से सिर्फ छोटे और मझोले ब्रैंड्स की शराब बिक रही है। पिछले 20 दिनों से महंगे बैंड्स की बिक्री लगभग थम गई है। ठेकेदार विकास श्रीवास्तव की मानें तो अभी अंग्रेजी शराब की बिक्री रोज पीने वालों के कारण ही हो रही है।

दुकानदारों का कहना है की ऐसे ही चलता रहा तो हमारे लिए दुकान चलना मुश्किल हो जायेगा सरकार के कोटा तय करने के कारण माल उठाना तो हमारी मज़बूरी है लेकिन बिक्री न होने के कारण यह माल हम कहा स्टोर करें गोदामों में तो पहले का ही स्टॉक भरा पड़ा हैं।

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