भूजल प्रबंधन का मसौदा विवादों में घिरा

भारत सरकार ने देश में बढ़ते जलसंकट को ध्यान में रखते हुए, वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता के साथ लागु करने तथा लोगों तक स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के खातिर पर्यावरण मंत्रालय को एक मसौदा तैयार करने को कहा, ताकि देश में कहीं भी पानी की किल्लत से लोगों को न जूझना पड़े, लेकिन लगता  है की इस मसौदे पर अभी से विवाद शुरू हो गया है।  नेशनल ग्रीन टिब्यूनल के आदेश पर पूरे भारत में भूगर्भ जल के दूरगामी प्रबंधन व रेगुलेशन के लिए पर्यावरण मंत्रलय की ओर से तैयार मसौदा, मंजूरी के पहले ही विवादों में घिर गया है। जलशक्ति मंत्रलय के तहत जल संसाधन विभाग ने इस मसौदे की कई सिफारिशों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीती जनवरी में एनजीटी ने भूजल प्रबंधन की समग्र रणनीति तैयार करने का जिम्मा जल संसाधन मंत्रलय से हटाकर पर्यावरण मंत्रलय को सौंपा था। पर्यावरण मंत्रलय ने एक विशेषज्ञ समिति की मदद से तैयार मसौदे में भूजल प्रबंधन के मकसद से कृषि क्षेत्र से लेकर सभी भूजल उपभोक्ताओं के रेगुलेशन की सिफारिश की है। इस मसौदे पर एनजीटी जल्द सुनवाई करेगा, परंतु मसौदे में कृषि क्षेत्र के साथ-साथ औद्योगिक, इंफ्रास्ट्रक्चरल क्षेत्रों के लिए किए गए कई प्रावधानों व बंदिशों पर जल शक्ति मंत्रलय ने विभिन्न स्तरों पर विचार कर एतराज जताया है। जल शक्ति मंत्रलय के अधीन जल संसाधन विभाग एनजीटी के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज करेगा।

वर्षा जल संचयन के वर्तमान प्रयासों के साथ देश में एनजीटी की पहल पर भूजल रेगुलेशन के समग्र प्रस्ताव के लागू होने की जो उम्मीद जगी थी, वह फिलहाल जिम्मेदार महकमों के आपसी विवादों के चलते साकार होती नहीं दिख रही। यह स्थिति तब है जबकि देश के तमाम राज्य चौतरफा भूजल संकट झेल रहे हैं।

मसौदे की मुख्य सिफारिशें

कृषि क्षेत्र में सभी नलकूपों का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा -तीन हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में दोहन के लिए नियम होंगे। सभी संकटग्रस्त क्षेत्रों में उद्योगों, आवासीय निर्माण, व्यावसायिक, इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यो के लिए नए नलकूपों पर पाबंदी होगी। पुराने नलकूपों से दोहन की सीमा का निर्धारण होगा और जल संरक्षण के लिए वाटर क्रेडिट योजना लागू होगी।

कहां-कहां है भूजल संकट

देश के 21 शहरों के साथ लखनऊ सहित यूपी के 10 शहर भूजल संकट का सामना कर रहे हैं । दिल्ली का  82 फीसद, राजस्थान का  81 प्रतिशत, पंजाब व हरियाणा का  75 फीसद, तमिलनाडु में 59 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश का 30 फीसद क्षेत्र संकटग्रस्त श्रेणी में आता है।

चीयर्स डेस्क

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