भारत भीषण जलसंकट की चपेट में

भारत भीषण जलसंकट का  सामना  कर रहा है, अभी हाल ही में, चेन्नई में हालात इतने बुरे हो गए कि ट्रेनों द्वारा पानी सप्लाई करना पड़ा। देश के कई इलाके पानी की कमी से जूझ रहे हैं।  खासकर गर्मियों में देश के कई इलाकों में पानी का भीषण संकट खड़ा हो जाता है।  पानी की कमी के पीछे कई चीजें जिम्मेदार है।  लेकिन एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी हमारे ऊपर भी है।  हम अपनी आदतों की वजह से पानी की कमी से जूझ रहे हैं।  रोजाना पानी की बर्बादी की हमारी आदत समस्या को और बड़ा बना रही है।

आपको सुनने में ये अजीब लग सकता है।  लेकिन क्या आपको पता है कि हम रोज करीब 48 अरब लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं।  जी हां कभी ब्रश और दाढ़ी बनाते वक्त नल खुला छोड़कर, कभी नहाते वक्त, तो कभी पानी भरते वक्त।  पानी की इतनी बर्बादी हो रही है कि रोज 48 अरब लीटर पानी यूं ही जाया हो रहा है।

अगर जल दोहन पर लगाम नहीं लगाई गयी तो हालात और भी बदतर होंगे। यहाँ ये बताना जरूरी है कि तमिलनाडु जहाँ लोग बूंद भर पानी के लिए तरस रहे हैं,  वहां सभी राज्यों से ज्यादा बोतलबंद पानी के प्लांट हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ तमिलनाडु ही इस समस्या से ग्रस्त है भारत के अनेक राज्यों में हालात और भी बदतर  हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ की ही बात करें तो यहाँ भी भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत  ‘डे जोरो’ के  कगार पर है। इस स्थिति में नलों में भी पानी सूख  जाता है। मंगलवार को जारी एक अमेरिकी रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। विश्व संसाधन संस्था को ‘एकवेडक्ट वाटर रिस्क एटलस’ में जलसंकट, सूखा   और नदियों में बाढ़ के खतरे के आधार पर 189 देशों और उनके प्रांतों-राज्यों की रैंकिंग बनाई गई है। 189 देशों में भारत 13वें पायदान पर हैं।

भारत समेत 17 देश खतरनाक स्थिति में खड़े हैं, जिनमें दुनिया कौ एक चौथाई आबादी रहती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर भारत में भूजल स्तर में अत्यंत कमी आई है।

रिपोर्ट  में भारत के पूर्व जल संसाधन सचिव  शशि शेखर के हवाले से कहा गया है कि हाल ही में चेन्नई के जलसंकट ने दुनिया का ध्यान खींचा है लेकिन देश के कई हिस्सों में ऐसी स्थिति है। उन्होंने बताया है कि वर्षा ,सतही  और भूजल के विश्वसनीय आंकड़ों की मदद से भारत भविष्य की योजना बना सकता है।

चीयर्स डेस्क 

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