हानिकारक हो सकता है बोतल बंद पानी

यूपी के एफएसडीए यानी खाद्य सुरक्षा विभाग का दावा है कि बोतल बंद पानी यानी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर सबसे ज्यादा असुरक्षित होता है। हाल ही में इस विभाग ने यूपी की राजधानी लखनऊ में बिक रहे खाद्य पदार्थों में सबसे ज्यादा पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर ही असुरक्षित पाए गए। सरकार की ओर से करवाई गई जांच के मुताबिक 66 फीसदी पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर मिस्ड ब्रैंडेड हैं। ऐसे पैकेज्ड वॉटर में बैक्टीरिया और फंगल होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। हालांकि सरकारी हो या कोई निजी कार्यक्रम या फिर चलते फिरते, अब पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर ही प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा रह गया है। हर ओर इसी की भरमार है।

हालांकि विभाग या इस विभाग की मुखिया अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन ने यह नहीं बताया कि मिस्ड ब्रैंडेड से उनका आशय क्या है। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि जिन नमूनों को उन्हांेने मिस्ड ब्रैंडेड की श्रेणी में रखा है, वह नमूने फेल किए गए हैं या उन्हें पास की श्रेणी में रखा गया है। इस विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। इस विभाग की ओर से किसी प्रकार की कोई जानकारी साझा नहीं की जाती है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने सरकार के निर्देश पर बीते दिनों प्रदेश के हर जिले में अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे। इस विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ अनीता भटनागर जैन ने बताया कि 155 पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर, आइस्क्रीम और कुल्फी के 285, कोल्ड ड्रिंक के 35, दुग्ध उत्पाद के 691 और अन्य पदार्थों के 46 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनकी जांच छह प्रयोगशालाओं में करवाई गई थी। जांच में 3.4 प्रतिशत खाद्य पदार्थ असुरक्षित, 11 प्रतिशत मिस्ड ब्रैंडेड और 53.6 प्रतिशत मानकों के विपरीत पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि 217 पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर के लाइसेंस धारकों के यहां जांच की गई थी। इसमें से 66 प्रतिशत मिसब्रैंड पाए गए थे। इनके प्रॉडक्ट्स पर बैच नंबर, पैकिंग डेट और एक्सपायरी की अवधि उल्लिखित नहीं थी।

विभाग ने यह नहीं बताया कि न अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कोई जानकारी दी कि इन नमूनों के बारे में आगे क्या कार्रवाई की जा रही है। पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर का मामला यह है कि इसकी सप्लाई पूरे यूपी में सबसे अधिक लखनऊ में ही है। एक अनुमान के अनुसार पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर अपने उत्पादन का करीब 15 प्रतिशत यूपी की राजधानी लखनऊ में ही खपत कर देता है। इस कार्य में उत्तराखंड की कई कम्पनियों ने फिलहाल वर्चस्व बनाया हुआ है।

चियर्स डेस्क


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