बिहार में अब पीने के पानी की किल्लत

बिहार के भागलपुर जिले में बाढ़ के पानी के नीचे उतरने के साथ ही डायरिया, डेंगू, पेट दर्द व अन्य बीमारियों के बढ़ रहे हैं। पीएचईडी की लापरवाही से डायरिया के मरीज बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से डेंगू, पेट दर्द व अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। बाढ़ के पानी में जिले के डूबे करीब 2400 हैंडपम्प के पानी से बाहर आने के बाद चार दिनों बाद भी पीएचईडी सभी हैंडपम्प को डिस इन्फैक्टेड नहीं कर सका। महज 450 हैंडपम्प ही डिस इन्फैक्टेड हो सके हैं। ऐसे में 1950 हैंडपम्प के दूषित पानी को पीने के लिए ग्रामीण विवश हैं।

कहलगांव के कुर्मा पंचायत में तो लोग कुएं का दूषित पानी पी रहे हैं। इससे डायरिया के मरीजों की लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विभाग की इस लापरवाही कीमत चार बच्चों समेत 8 लोगों को अपनी जान देकर भी चुकानी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग भी सभी प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पावडर और चूने का छिड़काव नहीं कर सका है। इससे पसरी गंदगी लोगों को बीमार बना रही है।

जिले में लोगों की प्यास बुझाने के लिए लगाए पीएचईडी ने 14650 हैंडपम्प लगाए हैं। जिले के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में लगे उक्त हैंडपम्प में करीब 2400 हैंडपम्प बाढ़ के पानी में डूब गए थे। इससे उक्त हैंडपम्प का पानी दूषित हो गया। बाढ़ का पानी चार दिनों में घटने लगा, इसके बाद भी जिम्मेदार हरकत में नहीं आए। उन्होंने सभी ग्रामीण क्षेत्र में उक्त हैंडपम्प से पानी पी रहे ग्रामीणों की सेहत की परवाह ही नहीं की। पीरपैंती के एकचारी दियारा में डायरिया से चार लोगों की मौत के बाद विभाग जागा और इसके बाद दूषित हो चुके हैंडपम्प के पानी को शुद्ध और बैक्टीरिया फ्री करने का जिम्मा उठाया।

कई पंचायतों में हैंडपम्प से निकल रहा है दूषित पानी

पीएचईडी से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्वी क्षेत्र में चार दिनों में चिह्नित 1200 हैंडपम्प में महज करीब 200 हैंडपम्प को ही बैक्टीरिया फ्री किया। इसी तरह पश्चिमी क्षेत्र में नाथनगर की पांच पंचायतें, सुल्तानगंज में तीन और शाहकुंड में दो गांवों में चिह्नित 1200 में भी महज करीब 250 हैंडपम्प को ही डिस इन्फैक्टेड किया जा सका। बाकी 1950 हैंडपम्प अब भी दूषित हैं और लोग इसका पानी पीने को विवश हैं।

चीयर्स डेस्क 

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