बिहार की शराबबंदी से यूपी की मौज

हर बड़ा कारोबारी बिहार की सीमा से सटे बार्डर की शराब दुकान लेना चाहता है। इसकी वजह इन दुकानों से होने वाली अकूत कमाई है। हाल यह है कि यूपी के साथ ही बिहार के बड़ेे कारोबारी भी इन दुकानों पर अपना आधिपत्य चाहते हैं। नये वित्तीय वर्ष के लिए आजमगढ़ के एक कारोबारी ने बिहार सीमा से सटी लार रोड की अंग्रेजी शराब की एक दुकान झटक ली है। सीमा पर स्थित इन सभी दुकानों की लाइसेन्स फीस प्रदेश के किसी भी माडल शाप से अधिक है। स्थिति यह है कि बार्डर के किसी दुकान की लाइसेन्स फीस 70 लाख रूपये से कम नहीं है। इन स्थितियों के बीच कमाई के लिए यूपी का आबकारी महकमा बार्डर पर और अधिक दुकानें खोलने के मूड में है। सब मिलाकर बिहार की शराबबंदी का लाभ यूपी उठा रहा है।

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बिहार के सीमा से सटी हुई देशी, अंग्रेजी व बीयर की 265 लाइसेन्सी दुकानें हैं। इसमें 90 फीसदी दुकानें देवरिया व कुशीनगर जिले में है। देवरिया व कुशीनगर की प्रमुख दुकानों में मेहरौना, मझौली, बनकटा, पनिअहवां, लार रोड, सलेमगढ़, डिबनी, बजरवां, तमकुही, पठेरवां, दुदही आदि हैं। बिहार में शराबबंदी के बाद बार्डर के दुकानों की बिक्री 40 फीसदी बढ़ी है। बलिया व गाजीपुर जिले की भी कई दुकानें बिहार के बार्डर से सटी हुई है। इनमें से किसी भी दुकान की लाइसेन्स फीस 70 लाख रूपये से कम नहीं है। यही वजह है कि यूपी का आबकारी महकमा बिहार की सीमा से सटे इलाकों में शराब की और दुकानें खोलने का मूड बना लिया है। अकूत कमाई होने के कारण ही हर बड़ा शराब कारोबारी बार्डर पर दुकान लेेना चाहता है।

आजमगढ़ से संदीप अस्थाना

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