बारिश ने बनारस में कम कर दिया पीने का पानी

चार दिन की बारिश ने बनारस की व्यवस्थाओं की पूरी पोल खोलकर रख दी है।  शहर का कोई भी ऐसा कोना नहीं बचा है जहां पानी नहीं जमा हुआ हो। बारिश आई और गई लेकिन बारिश जाने के चार दिन के बाद भी सभी जगह पानी जमा हुआ है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस लाइन, पुलिस आवास, पुलिस ग्राउंड, पुलिस क्लब आवास, ज़िला प्रतिसार कार्यालय, जिला बेसिक अधिकारी कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में बरसात का पानी लबालब भर गया जिसके कारण सभी काम रुके हुए हैं। जल निकासी की सही व्‍यवस्‍था नहीं होने से लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस गया, कोनिया, सामने घाट, सरैया, डोमरी, नगवा, रमना, बनपुरवा, शूलटंकेश्वर के कुछ गांव, फुलवरिया, सुअरबड़वा, नक्खीघाट, सरैया समेत कई इलाकों में पानी कहर मचा रहा है जिससे हालत बेहद ख़राब हो गए हैं। बाढ़ के बाद हालात और भी बदतर होते जा रहे हैं शहरी विकास मंत्रालय बनारस को स्मार्ट बनाना चाहता है लेकिन हकीकत यह है कि जिस बनारस को स्मार्ट बनाने की बात की जा रही है एक शहर के तौर पर उसका ढांचा ही छिन्न भिन्न हो गया है।

पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी बारिश के पानी से बेहाल

भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने अक्टूबर 2013 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमे कहा गया था कि शहरी सीमा में पेयजल की सप्लाई का 38 फीसदी हिस्सा गंगा से आता है बाकी पानी 220 ट्यूब बेलों के माध्यम से होता रहा है। दिलचस्प यह है कि शहर में 69 फीसदी आबादी के पास बनारस जल संस्थान का पानी कनेक्शन है और उनमे से 42 फीसदी यहाँ की झुग्गी झोपड़ियों में हैं। हांलाकि कशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि बनारस में ,विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानको  के अनुरूप जल उपलब्ध कराने में सरकार नाकामयाब रही है आज के दिन में बनारस शहर में पानी की सप्लाई के लिए प्रतिदिन गंगा से 2700 लाख लीटर पानी लिया जाता है ,लेकिन फिर भी एक चौथाई जनता को स्वच्छ पेय जल नही मिल पा रहा।

शहर में पानी की कमी से ज्यादा समस्या पानी की गंदगी से है। गंगा अनुसंधान कार्यक्रम के प्रो बीडी त्रिपाठी कहते हैं असली समस्या यह है कि शोधित जल में भी सीवर का पानी मिल जा रहा है इसकी बड़ी वजह यह है कि पीने के पानी की लाइन शहर में जगह जगह पर टूटी हुई है।दिन में चूँकि इन पाइपों में पानी का दबाव रहता है इसलिए इसमें सीवर का पानी नहीं घुस पाता ,लेकिन जब शाम को दबाव कम होता है सीवर का पानी ,पीने के पानी के नलों में प्रवेश कर जाता है और लोगों को सुबह गन्दा पानी पीना पड़ता है।

 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की कम क्षमता ,शहर में पानी की विशालकाय टंकियों का अभाव भी इस समस्या के मूल में हैं।शहर में केवल भेलूपुर का प्लांट काम कर रहा है एक अन्य प्लांट के निर्माण का प्रस्ताव अधिग्रहण से जुड़े बवाल में उलझ कर रहा गया है  |टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीटयूट ने अपने दो सालों के सर्वेक्षण में पाया है कि बनारस की 80 फीसदी जनता मानती है गंगा का प्रदूषित जल उनकी सेहत पर असर डाल रहा है।

चीयर्स डेस्क 

loading...

Check Also

Close
Close
Close