अब खुद नष्ट हो जाएंगी पानी की बोतलें, जानिए कैसे

प्लास्टिक की पानी की बोतल जल्द ही पर्यावरण के लिए खतरा नहीं रहेगी। केंद्र सरकार बोतलबंद पानी के लिए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। इससे बनी पानी की बोतल तय समय में खुद नष्ट हो जाएगी। इसके उपयोग से देश में एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर रोक लगाई जा सकेगी। अभी यूरोप और कई दूसरे देश इस तरह की बायोडिग्रेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के एक अधिकारी ने बताया कि बोतलबंद पानी के लिए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक इस्तेमाल करने को लेकर प्रयोग अंतिम चरण में है। यह प्लास्टिक 99 फीसदी तक बायोडिग्रेबल है। उन्होंने कहा, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनिरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) इसकी जांच कर रहा है कि यह कितने समय में नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाती है।

क्या है बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक

प्लास्टिक के पर्यावरण पर बढ़ते दुष्प्रभावो के चलते पुरी दुनिया में इसके विकल्पों की तलाश होने लगी है | उसी तलाश का परिणाम आज बायो प्लास्टिक के रूप में सामने आया है | बायो प्लास्टिक प्राकृतिक रूप से आसानी से नष्ट हो जाने वाले प्लास्टिक है जिन्हें पाली लैक्टिक एसिड पॉलीमर से तैयार किया जाता है ये बिल्कुल पॉलिथीन के ही जैसे होते है | इनका निर्माण सब्जियों में मौजूद वसा ,तेल  ,कॉर्न और मटर में मौजूद स्टार्च से भी किया जा सकता है इसके आलावा सूक्ष्म शैवालो और केलो के छिलके की मदद से भी इन्हें तैयार किया जा सकता है | इस कारण ये आसानी से नष्ट हो जाते है और इनसे निकलने वाले कार्बन-डाई-ओक्साइड की मात्रा भी काफी कम होती है जिससे ये पर्यावरण के लिए नुकसानदेह नही है |

दरअसल इस तरह तैयार होने वाली यह प्लास्टिक पेट्रोकेमिकल से तैयार होने वाली प्लास्टिक की तुलना में काफी महंगी होती है इसी कारण यह प्लास्टिक की तरह लोकप्रिय नही हो पायी है | बायो प्लास्टिक के आलावा भी कई ऐसी चीजे है जो प्लास्टिक का विकल्प बन रही है ज्यादातर दुकानों में फैंसी प्लास्टिक की जगह अब जुट, पेपर , कपड़े और बांस से बने बैग्स का इस्तेमाल किया जाने लगा है |

चीयर्स डेस्क 

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