बागपत से शाहगंज तक रोज काटी जाती है शराब उपभोक्ताओं की जेब

जौनपुर, बागपत। पूर्वी यूपी का जौनपुर हो या पश्चिमी यूपी का बागपत, शराब उपभोक्ताओं के शोषण में कोई जिला किसी से कम नहीं है। जौनपुर जिले के शाहगंज में हर रोज शराब उपभोक्ताओं की जेब काटी जाती है। लेकिन ये उपभोक्ता कुछ भी नहीं कह पाता क्योंकि सुनने वाला कोई नहीं है। न पुलिस सुनती है, न आबकारी विभाग। कुछ शराब उपभोक्ता ऐसे जरूर हैं जो इसका प्रतिरोध करते हैं और जमकर तकरार भी करते हैं। ज्यादातर मामलों में पुलिस भी शराब दुकानदारों से मिली हुई प्रतीत होती है। यही वजह है कि प्रतिरोध करने वाले ज्यादातर लोग विवाद होने की स्थिति में पुलिसिया प्रताड़ना के भी शिकार होते हैं। हां, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके सामने पुलिस बैकफुट पर चली जाती है और शराब दुकान का सेल्समैन भी घुटने टेक लेता है। बावजूद इसके यह खेल बदस्तूर जारी रहता है।

जौनपुर जिले के बड़े कस्बों में शाहगंज की गिनती होती है। शाहगंज नगर पालिका होने के साथ-साथ तहसील मुख्यालय भी है और लम्बे समय से शाहगंज को अलग जिला बनाये जाने की मांग की जा रही है। शाहगंज में अंग्रेजी शराब की तीन लाइसेन्सी दुकानें करीब करीब हैं। इसमें एक दुकान रोडवेज पर, एक दुकान पवई रोड पर व एक दुकान आजमगढ़ रोड पर है। इन तीनों दुकानों के सेल्समैन ग्राहकों से पौवा पर पांच रूपये, हाफ पर दस रूपये व बोतल पर बीस रूपये अधिक वसूलते हैं। लम्बे समय से यह खेल चल रहा है।

पवई रोड के दुकानदार ने स्थानीय लोगों के लिए एक रियायत भी की है कि स्थानीय लोगों को वाजिब दाम पर शराब बेचता है। इसीलिए स्थानीय लोग उसी के यहां से खरीदारी करते हैं। इन तीनों दुकानों पर पीने वाले जानते हैं कि उनकी जेब काटी जा रही है, फिर भी मौन होकर चले जाते हैं। कुछ लोग विरोध करते हैं तो सेल्समैन से उनका विवाद हो जाता है। विवाद बढ़ने पर सेल्समैन पुलिस बुला लेता है। पुलिस शराब उपभोक्ता का पक्ष नहीं लेती है। ऐसे में पुलिसिया प्रताड़ना के शिकार बेचारे शराब उपभोक्ता ही होते हैं। कभी कभार ओहदेदार शराब उपभोक्ता पहुंच जाते हैं तो वह पुलिस को भी जमकर लताड़ते हैं। पुलिस के बैकफुट पर जाते ही सेल्समैन घुटने टेक देता है और वह उस दबंग व्यक्ति को वाजिब दाम पर शराब दे देता है। हर रोज की तकरार के बावजूद यह जेबकतरी बदस्तूर जारी है।

देखिए कैसे लुटे जा रहे है शराब उपभोक्ता

यूपी में प्रिंट रेट से अधिक रेट में शराब मिलना कोई नई बात नहीं है। प्रिंट रेट से महंगी शराब बेचने की शिकायतें भी होती रहती हैं। जिला प्रशासन जांच कर दोषी को सजा दिलानें की बात भी करतें हैं। लेकिन होता कुछ नहीं है। ओवर रेटिंग का एक और मामला यूपी के बागपत जिले की खेकड़ा तहसील के रटौल गांव में स्थित बियर की दुकान का भी है जहां पर खुले आम प्रिंट रेट 140 रुपए की बीयर 150 रुपए की बियर बिक रही है। चीयर्स डाॅट काॅम के संवाददाता ने जिला आबकारी आधिकारी, बागपत राम उजागर मौर्य से अधिक दाम वसूलने की शिकायत की तो उन्होंने जांच कराने की बात कही और यह भी जानकारी दी कि यदि ऐसा गलत कार्य कोई भी सरकारी दुकानदार करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।

सुनिए क्या कहा जिला आबकारी अधिकारी बागपत नें –

चियर्स डाॅट काॅम ने नोएडा में शराब की ओवर रेटिंग की खबर कुछ दिन पूर्व प्रकाशित की थी।

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जौनपुर या बागपत या फिर नोएडा ये समाचार एक उदाहरण मात्र हैं, इसी तरह के समाचार यूपी के अधिकांश जनपदों से आते रहते हैं, शराब उप भोक्ताओं के उपभोक्ता हितों की रक्षा करने के प्रति हर ओर उपेक्षा का भाव नजर आता है। जिला प्रशासन हो या फिर आबकारी विभाग, या शासन के उच्चाधिकारी, शराब उपभोक्ता के प्रति इन सबका व्यवहार सामान्य नहीं रहता है। यही कारण है कि शराब उपभोक्ता को हर जगह लूटा जाता है।

क्या कहते हैं शराब उपभोक्ता

शाहगंज में आजमगढ़ रोड वाली अंग्रेजी शराब की दुकान के पास ही एक पैथोलाजी के संचालक सच्चिदानन्द शिलाची नियमित शराब पीने के शौकीन हैं। अकसर ही उनके यहां दोस्तों का भी जमावड़ा लगता है, मगर वह अपने पास की दुकान से शराब नहीं मंगवाते हैं। वह अपने लिए शराब पवई रोड स्थित उस दुकान से मंगवाते हैं जो स्थानीय लोगों को वाजिब रेट पर शराब बेचता है। उनका कहना है कि यहां तो जहर की भी कालाबाजारी हो रही है। उन्होंने बताया कि उन लोगों ने कई बार इसकी पुलिस से शिकायत की मगर पुलिस ने कुछ नहीं किया। शाहगंज के ही संजय सिंधी ने मायूस होते हुआ कहा कि शराब कारोबारियों का जंगलराज कम से कम शाहगंज से तो खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है।

जौनपुर से संदीप अस्थाना / बागपत से नीरज महेरे

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