बनारसियों को लुभा रहे मिट्टी के गिलास

बीते 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर लोगों से देसी तरीकों का इस्तेमाल करने की अपील की थी। जिसका असर अब उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देखने को भी मिल रहा है। यहां गुजरात की एक कंपनी के सहयोग से एक तरफ जहां मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नए डिजाइन के बर्तन मार्केट में लाने की तैयारी है। मिट्टी से बनी पानी की बोतल, जग और गिलास को अब सरकारी बैठकों तक पहुंचाने की भी प्लानिंग की जा रही है। मिट्टी से बनी बोतल और गिलास की प्रदर्शनी को लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

गुजरात की कंपनी से किया टाइ-अप

दरअसल, सभी जगहों पर प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल अभी किया जा रहा है, इसे देखते हुए बनारस के कुछ व्यापारी वर्ग के लोगों ने गुजरात की एक मिट्टी यानी टेराकोटा के प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी के साथ बनारस में कुम्हारों का टाइ-अप करवाया है। टेराकोटा से बने बर्तन और टेराकोटा की बनी बोतलें यहां के लोगों को खूब भा रही हैं। लगभग डेढ़ सौ रुपए कीमत की बोतल और 25 से 50 रुपये तक के गिलास लोगों को खासा पसंद आ रहे हैं। जिसके बाद अब इनको सरकारी बैठकों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि प्लास्टिक की जगह पानी पीने के लिए मिट्टी की बोतलों का इस्तेमाल कर देसी तरीके से प्रधानमंत्री मोदी के सपने को पूरा किया जा सके।

जगी उम्मीद

मिटटी से बने इन डिजाइनदार बर्तनों को देख जहां आम जनता इसे प्रयोग में लाने के लिए उत्सुक है तो वहीं कुम्हार भी खासा उत्साहित हैं। मिट्टी के दीयों का स्थान ले चुकी झालर लाइट के कारण इनके व्यापर पर ख़ासा असर पड़ा है। ऐसे में इनके लिए लागत निकाल पाना भी मुश्किल था। लेकिन अब इन बर्तनों को देख इन्हें एक उम्मीद जगी है।

इन बर्तनों को लोगों तक पहुंचाने के लिए इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, ताकि लोग इन बर्तनों के बारे में जान सकें और प्लास्टिक का उपयोग न करके अब खाने और पीने के सामान के लिए इसका प्रयोग करें। अगर गुजरात की मिट्टी से निकली ये खुशबू पूरे देश में फैलती है तो जहां कुम्हार एक बार फिर मिट्टी से सोना पैदा कर पाएंगे तो वहीं देश को प्लास्टिक मुक्त करने में भी मददगार साबित होगी।

चीयर्स डेस्क

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