फेनी जैसी मशहूर नहीं हो पाई कोई दूसरी देशी शराब

उत्तरी गोवा में कम लेकिन दक्षिणी गोवा में फेनी के लिए फज़ा ज्यादा अच्छी मालूम होती है हालांकि उत्तरी गोवा के पणजी में ही अधिक मिलती है फेनी, फेनी यानी गोवा की देशी शराब। गोवा जितना अपने खूबसूरत समुद्र तटों के लिए जाना जाता है, उतना ही फेनी के लिए भी। किसी भी राज्य क्या देश के किसी भी स्थान की कच्ची शराब इतनी नहीं मशहूर हुई है जितनी गोवा की फेनी। लेकिन रूसी पर्यटकों के बढ़ते दबाव के कारण गोवा में फेनी को पीने वालों पर्यटकों की तादाद में दिन पर दिन कमी आ रही है।

इसके बावजूद फेनी की जादूगरी कायम है, उसे पीने वाले बढ़ नहीं रहे तो कम भी नहीं हो रहे हैं, इसके बावजूद कि उसमें तीखी झार अभी भी है। दक्षिण गोवा के कोलवा बीच के आस पास या फिर फोंडा के आस पास की दुकानों पर ताज़ी फेनी भी मिल जाती है। दक्षिण गोवा ही क्या ओल्ड चर्च से लेकर पणजी तक के रास्ते में सड़क किनारे काॅफी शाॅप में भी फेनी पीने को मिल ही जाती है।

लेकिन फेनी जैसे तीस साल पहले मिलती थी, वैसे ही अभी भी मिल रही है। इसका औद्योगीकरण नहीं हुआ। क्यों, इस सवाल के जवाब में फांेडा के पास नारियल पानी की एक दुकान पर शैले कार्निस बताते हैं कि ऐसा किया नहीं गया। कारण बड़ी कम्पनियों की साजिश कि उनके बाजार पर फेनी पानी न फेर दे। इसके अलावा दूसरा कारण ये है कि अभी भी गोवा में जितनी फेनी बनती है, उसकी 70 फीसदी से अधिक खपत गोवा में ही हो जाती है, इसे यहां की भाषा में घरों में खपत कहा जाता है। शेष 30 फीसदी ही बाजार के लिए भेजी जाती है। एक प्रकार से इसे जानबूझकर मार्केट नहीं किया जा रहा है।

फेनी-जैसी-मशहूर-नहीं-हो-पाई-कोई-दूसरी-देशी-शराब

गोवा के कई बाजारों की शराब दुकानों पर फेनी की बोतलें 800 रुपए से 2000 रुपए तक मौजूद थीं लेकिन इनके ग्राहक कम ही थे। क्योंकि ये दूसरी अंग्रेजी शराब की तरह रिफाइंड नहीं होती है। दुकानदारों का कहना है कि फेनी को गोवा की कच्ची शराब के रूप में जो स्वीकार्यता है, वही रहनी चाहिए, अगर बड़े पैमाने पर निवेश कर इसे मार्केट करना शुरु कर दिया गया तो फिर फेनी बचेगी ही कहां। गोवा के बाजारों में आठ फीसदी अल्कोहल से लेकर 42 और 47 फीसदी तक अल्कोहल की तीव्रता वाली काजू की फेनी की बोतलें बिकती नजर आ जाती हैं। आधुनिक बोतल में पैैक्ड फेनी का गोवा से निर्यात भी होता है। इसकी मांग काफी है लेकिन सप्लाई मांग अनुरूप नहीं हो पाती है या जानबूझकर नहीं की जाती है।

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गोवा में फेनी का इतिहास काफी पुराना है। अभी गोवा में करीब 4000 स्थानों पर फेनी बनती है। अधिकांश में नारियल पानी से और काजू से भी। समुद्री तटों पर काम करने वाले, मछुआरों और समुद्री स्थानों पर रहने वालों के लिए भी फेनी जितना स्वास्थ्य वर्धक पेय दूसरा कोई नहीं है। पुर्तगालियों के आने से पहले यहां नारियल के पानी से ही फेनी बना करती थी, पुर्तगालियों ने तरह तरह के काजू से फेनी बनाने की शुरुआत की। पुर्तगालियों ने ही काजू के पेड़ यहां लगाए जो अब गोवा की पहचान भी बन चुके हैं, उन्होंने ही यहां नारियल पानी में फेनी और दूसरी तरह की शराबों को पीने का चलन डाला।

चीयर्स डेस्क

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