फुटओवर ब्रिज बने शराबियों के सुरक्षित अड्डे

दिल्ली में पिछले दिनों पुलिस सख्त हुई तो अब कनाॅट प्लेस के मिडिल सर्किल में शराबियों के हुजूम दिखना बंद हो गए। छोटे छोटे अड्डों पर भी गाज गिरी और शराबियों ने कनाॅट प्लेस क्या शेष इलाकों में  भी सड़क किनारे पीना लगभग बंद कर दिया। लेकिन एक और राजधानी है, लखनऊ, यहां अभी भी सड़क किनारे बोतल खोल देने पर किसी को कोई डर नहीं है।

लखनऊ के बढते टैफिक के दबाव को कम करने के लिए पिछले दिनों ढेर सारे ओवर ब्रिज और फुट ओवर ब्रिज का निर्माण हुआ है। इन ब्रिज के नीचे की खाली जगह को नवाबों के शहर के लोगों ने पीने के लिए सुरक्षित जगह बना लिया है। शाम ढलते ही लोग इन ब्रिज के नीचे अपना बार खोल लेते हैं। ब्रिज तले ये बार देर शाम तक चलते रहते हैं।

कुछ ब्रिज तो शराबियों के कारण इतने कुख्यात हो गए हैं कि उन पर शाम को लोग आने जाने से डरने लगे हैं। शाम को या रात के समय महिलाएं इन फुट ओवर ब्रिज का प्रयोग करने से डरती हैं  कि कहीं उनके साथ कुछ अनहोनी न हो जाए। चीयर्स डाॅट काॅम की टीम ने लखनऊ के बहुत से ओवर ब्रिज पर जा कर देखा तो पता चला कि सभी का हाल लगभगएक जैसा ही था, कहीं शराब की बोतल मिली तो कहीं पाउच। टीम लखनऊ के सबसे भीड़ भाड़ वाले पालीटेकनिक चैराहे के ओवार ब्रिज पर पहुंची तो वहां का नाजारा तो और भी बदतर था, पूरे ब्रिज पर हर जगह सिर्फ बोतल व दारू के पाउच पडे़ हुए थे।

इस दौरान टीम ने खुले में शराब पी रहे कुछ लोगो से बात भी की तो उनका कहना था कि घर पर बीवी और बच्चे घर पर शराब पीने नहीं देते। ये पूछने पर कि तो फिर माॅडल शाॅप पर क्यों नहीं पीते, तो इनमें से कई ने एक स्वर में कहा कि वहां सब कुछ बहुत मंहगा होता है जबकि ओवर ब्रिज पर शराब पीने पर किसी का न कोई डर है और न कोई अतिरिक्त शुल्क, और सबसे अच्छी बात ये है कि माहौल एकदम साफ और खुला हुआ। मस्त हवा जबकि माॅडल शाॅप में बहुत घुटन होती है। टीम ने वहां शराब पी रहें कुछ युवाओं से भी बात की वो उनका कहना था कि घर पर शराब पी नहीं सकते और माॅड़ल शाॅप या बाॅर में परिचित के सामने पड़ जाने का डर रहता है, ये जगह सबसे सुरक्षित है। लखनऊ ही क्या यूपी के तमाम शहरों में कोने में चोरी से शराब पीने का चलन आम है।

शशांक तिवारी

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