फरमानों में फंस गए शराब कारोबारी

शराब कारोबारियों के बीच यूपी की प्रमुख सचिव आबकारी के फरमानों की चर्चा जोरों पर है शराब की उठान को लेकर उन्होंने जिस प्रकार से तारीख पर तारीख बदली उसे लेकर कारोबारी असमंजस में थे और इसका खामियाजा शराब उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ा पूरे पूर्वांचल में शराब उपभोक्ताओं को मन पसंद ब्रांड न मिल पाने के पीछे मुख्य कारण शराब कारोबारियों के मुताबिक प्रमुख सचिव के फरमान हैं। शराब कारोबारियों का कहना है कि यही स्थितियां रही तो वह लोग सड़क पर आ जायेंगे। इनका कहना है कि जितना रूपया लगाकर वे लोग ये कारोबार कर रहे हैं, शराब न मिलने के कारण उस औसत में उनको मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। यही हाल रहा तो वह लोग दूसरा व्यापार करने को विवश हो जायेंगे। इन फरमानों की वजह से पूर्वांचल का शराब कारोबार प्रभावित हो रहा है।

क्यों लाइसेन्सी दुकान से गायब हो गयी शराब

यह एक बड़ा सवाल है कि शराब की लाइसेन्सी दुकानों से शराब आखिर क्यों और कैसे गायब होे गई। इसकी वजह ये है कि पहले शराब की दुकानों के अनुज्ञापी जब चाहते थे, तब गोदामों से शराब का उठान करते थे। गोदाम वाले भी डिस्टलरी से हर महीने की 27-28 तारीख तक, यहां तक कि कभी कभी 31 तारीख तक उठान किया करते थे। इस बार मार्च महीने प्रमुख सचिव आबकारी का ये फरमान आ गया कि सभी अनुज्ञापी 15 मार्च तक शराब का उठान कर लें। बाद में जब हो-हल्ला मचा तो यह आदेश आ गया कि अब 19 मार्च तक उठान किया जा सकता है।

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जो लोग 19 मार्च तक शराब का उठान कर लिए, वही शराब बिक रही है। उठान न होने की वजह यह रही कि डिस्टलरियों के पास वह क्षमता ही नहीं थी कि वह सभी अनुज्ञापियों को मांग के अनुरूप 15 दिन पहले ही आपूर्ति दे दें। गोदाम पर शराब न होने के कारण अनुज्ञापी परेशान हैं। डिस्टलरी वालों का कहना है कि यदि वह 24 घंटे भी मेहनत करते तो भी 19 मार्च तक मांग के अनुरूप शराब की आपूर्ति नहीं कर पाते।

तमाम दुकानों पर तालाबंदी, पसंदीदा ब्रांड गायब

शराब न होने के कारण तमाम लाइसेन्सी शराब की दुकानों पर तालाबन्दी हो गई है और तमाम दुकानें बन्द होने के कगार पर हैं। पसंदीदा ब्रांड तो कमोवेश सभी शराब दुकानों से गायब हो चुके हैं। पूरे पूर्वांचल में समान स्थिति है। अंग्रेजी व देशी शराब के साथ बीयर तक सबका यही हाल हैै। पूर्वांचल के लोगों के जो पसंदीदा ब्रांड हैं उनमें अंग्रेजी शराब में सिग्नेचर, बलंडर प्राइड, आरसी, आरएस, आईबी, मैगडावल आदि, देशी शराब मेें बिंडेज, बिंडसर, पीके गोल्ड, मिस्टर लाइम, लैला आदि तथा बीयर में किंगफिसर, हैवर्ड 500, टू बर्ग आदि है। पसंदीदा ब्रांड न मिलने के कारण लोग कोई भी ब्रांड पीने को विवश हैं। कई इलाके ऐसे हैं जहां विस्की गायब हो जाने के कारण इस गर्मी में भी शराब के शौकीन रम पीने को तो कई इलाकों में कोई भी अंग्रेजी शराब न होने के कारण अंग्रेजी शराब पीने वाले लोग देशी शराब पीने के लिए मजबूर हैं।

आजमगढ़  से संदीप अस्थाना

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