प्रेग्नेंसी में भूल से भी न पिएं शराब

प्रेग्नेंसी के दौरान सिगरेट-शराब का सेवन कितना हानिकारक है ये तो हम सब जानते हैं। लेकिन कई बार बहुत सी महिलाएं जो प्रेग्नेंट होने से पहले सिगरेट या शराब पीती थीं वह अपनी urge को कंट्रोल नहीं कर पातीं और उन्हें एक लगता है कि थोड़े ऐल्कॉहॉल या स्मोकिंग से क्या फर्क पड़ेगा? हम आपको बता दें कि अगर आपकी या आपकी किसी दोस्त या रिलेटिव जो प्रेग्नेंट हैं और उनकी सोच ऐसी है तो आप उन्हें प्रेग्नेंसी में शराब पीने के खतरों के बारे में अवगत जरूर कराएं।

शराब का होने वाले बच्चे पर होगा बुरा असरप्रेग्नेंसी के दौरान अगर होने वाली मां ऐल्कॉहॉल यानी शराब का सेवन करती है तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का जन्म के वक्त वजन काफी कम हो जाता है, बच्चे के ब्रेन पर इसका बुरा असर पड़ता है और बच्चे के संज्ञानात्मक क्रियाएं भी प्रभावित होती हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि यूके की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च की और ये जानने की कोशिश की अगर कोई गर्भवती महिला शराब का सेवन करती है तो उसका होने वाले बच्चे पर क्या असर पड़ता है। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने प्रेग्नेंसी के दौरान ड्रिंकिंग करने से जुड़ी 23 स्टडीज का विश्लेषण किया और पुख्ता सबूत पाए कि प्रेग्नेंसी में शराब का सेवन करने से होने वाले बच्चे का जन्म के वक्त वजन कम हो जाता है और उसकी संज्ञानात्मक यानी ज्ञान संबंधी क्रियाएं प्रभावित होती हैं।

तीनों ट्राइमेस्टर में न करें शराब का सेवन
अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो यह पहली बार है जब अलग-अलग स्टडीज के इतने सारे नतीजों को मिलाकर एक स्टडी डिजाइन की गई है जिसमें तुलनात्मक रूप से प्रेग्नेंसी के दौरान ऐल्कॉहॉल का सेवन करने से क्या होता है इस बारे में बताया गया है। स्टडी में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा कि महिलाओं को इस बात को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए और प्रेग्नेंसी के तीनों ट्राइमेस्टर में से किसी में भी ऐल्कॉहॉल का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में न हो सर्दी-खांसी, आजमाएं ये तरीकेप्रेगनेंट महिलाओं को अपना खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव आने लगता है, जिसकी वजह से प्रेगनेंट महिलाओं को कई बार सर्दी-खांसी हो जाती है। कुछ तरीके हैं जो प्रेग्नेंसी में सर्दी-खांसी दूर रखेंगे।
जन्म के वक्त वजन होता है कम

इतना ही नहीं, स्टडी में ये बात भी कही गई है कि अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान ऐल्कॉहॉल का सेवन करती है तो इससे जन्म के वक्त तो बच्चे का वजन कम होता ही लेकिन बाद की उम्र में भी मुश्किलें हो सकती हैं और उन्हें एजुकेशन यानी पढ़ाई लिखाई में दिक्कत आती है। ये बातें इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि ऐल्कॉहॉल इंडस्ट्री प्रेग्नेंसी में ड्रिंकिंग के सेहत पर क्या नकारात्मक असर होते हैं इसको लेकर बेहद कन्फ्यूजिंग इन्फॉर्मेशन प्रमोट कर रही है।

खून से होकर बच्चे तक पहुंच जाता है ऐल्कॉहॉल
वैज्ञानिकों की मानें तो कोई सेफ लेवल या सेफ लिमिट नहीं है इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान पूरी तरह से ऐल्कॉहॉल से दूर ही रहना चाहिए। जब कोई महिला शराब पीती है तो ऐल्कॉहॉल खून से पास होकर प्लैसेन्टा तक पहुंच जाता है और फिर होने वाले बच्चे तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचाता है। लिहाजा सबसे सेफ अप्रोच यही है कि आप प्रेग्नेंट होते ही पूरी तरह से ऐल्कॉहॉल का सेवन बंद कर दें।

चीयर्स डेस्क 

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