प्रदूषित नदियों के पास का भूगर्भ जल पीने लायक

जिन हिंडन, काली व कृष्णी नदियों के इर्द-गिर्द जहरीले भूगर्भ जल की गूंज एनजीटी से लेकर केंद्र और प्रदेश तक गूंजी। लोगों के बीमार होने का हवाला दिया गया। उसी पानी को केंद्रीय भूजल बोर्ड ने पीने लायक घोषित कर दिया है। यह कहकर नदियों के आसपास के भूजल की स्थिति गुणवत्ता फिलहाल ठीक है।

भूगर्भ जल प्रदूषित होने का मुद्दा बड़े स्तर पर उठने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जागा था। उसने वर्ष 2017 में  इलाके के 159 स्थानों से भूजल के नमूने एकत्र किए। इनमें काली नदी पश्चिम के किनारे से 60 नमूने, काली नदी पूर्व से 31, हिंडन के आसपास 62 नमूने और कृष्णी नदी के पास से छह नमूने एकत्र किए गए थे।

ये सभी भूजल नमूने हैंडपंप, नलकूपों व निजी बोरिंग से लिए गए थे। करीब दो साल तक मुख्य रूप से भूजल गुणवत्ता की जांच में नाइट्रेट, आयरन, फ्लोराइड, आर्सेनिक, हार्डनेस व भारी धातुओं की पड़ताल की गई, जिनकी हाल में विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है।

निष्कर्ष    

  • मात्र 7 नमूनों में आर्सेनिक 10 पीपीबी की मानक सीमा से अधिक मिला है। यह गांव काली नदी व हिंडन नदी के निकट है।
  • काली पूर्व के निकट 35 फीसद, काली पश्चिम के पास 27 फीसद, हिंडन के इर्द-गिर्द 37 फीसद नमूनों में आयरन की मात्रा सुरक्षित सीमा से ज्यादा मिली है।
  • काली पश्चिम के 18 फीसद नमूनों में टोटल क्रोमियम तथा पांच फीसद में मैगनीज की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है।
  • फ्लोराइड सबसे अधिक 7.6 मिलीग्राम प्रति लीटर लगभग पांच गुना अधिक हिंडन के निकट शाहपुर ब्लॉक में मिला है।
  • नाइट्रेट हिंडन के 11 फीसद, काली पश्चिम के 15 फीसद तथा काली पूर्व के 19 फीसद नमूनों में मिला है।
  • जांच में यह भी पाया गया कि  सीवेज प्रदूषण के कारण बीओडी और सीओडी की मात्रा भी कई भूजल नमूनों में अधिक पाई गई है।

क्षेत्रीय निदेशक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि क्षेत्र में भूजल प्रदूषण को लेकर जो गंभीर स्थिति बताई जा रही है, वैसी स्थिति जांच में सामने नहीं आई है। पड़ताल में नीर संस्था का भी सहयोग लिया गया है। हां, कुछ स्थानों पर आयरन की समस्या अधिक पाई गई है। कुछ जगहों पर आर्सेनिक, फ्लोराइड, हार्डनेस, नाइट्रेट की अधिकता की पुष्टि हुई है। समग्र नजरिये से देखा जाए तो इन नदियों के इर्द-गिर्द भूजल पीने लायक है ।

चीयर्स डेस्क 

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