प्यास बुझाने वाली नदी में घुली जहरीली राख

आप के घर में आने वाली बिजली जिससे आप का घर रोशन होता है वो लाखों लोगों की जान को दांव पर लगा कर आप तक पहुंचाई जा रही है। बात हो रही है यूपी के तथाकथित सिंगापुर सोनभद्र की। सोनभद्र की खूबसूरती को देख कर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसकी तुलना सिंगापूर और न्यूजीलैंड से की थी। सोनभद्र जिले में रेणुका नदी पर बना रिहन्द बांध सोनभद्र और सिंगरौली के करीब 20 लाख लोगों के लिए पीने के पानी के लिए प्रमुख स्रोत है। लेकिन अब इसका पानी दूषित हो चुका है। इस दूषित पानी से कैंसर जैसी घातक बीमारियां भी हो सकती हैं। रिहंद बांध में एनटीपीसी संयंत्र से निकली करीब 35 मीट्रिक टन (सात करोड़ कुंतल से अधिक) राख समा गई है, जो नदी के पानी को जहरीला कर देगी।

यूपी के सोनभद्र जिले के शक्तिनगर क्षेत्र स्थित भारत के सबसे बड़ी बिजली उत्पादन संयंत्र नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) विंध्याचल का शाहपुर स्थित विशालकाय ऐश डैम (राखड़ बांध) 6 अक्टूबर, 2019 को टूट गया था। इस डैम में बिजली संयंत्रों में कोयले के जलने के बाद निकली राख जिसे फ्लाई ऐश कहा जाता है, को जमा किया जाता है। जहां डैम टूटा वहां अभी भी बड़ी मात्रा में राख मौजूद है जिसे मजदूर लगाकर हटवाया जा रहा है। यही नहीं, आसपास के कई खेतों में भी ये दूषित पानी अभी जमा है।

यूपी और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थिति सिंगरौली-सोनभद्र पट्टी में कोयले पर आधारित 10 पावर प्लांट हैं, जो 21,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं।  देशभर में पर्यावरण संरक्षण और वनों एवं प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए बने अधिकरण राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अधिनियम के अनुसार फ्लाई ऐश में भारी धातु जैसे-आर्सेनिक, सिलिका, एल्युमिनियम, पारा और आयरन होते हैं, जो दमा, फेफड़े में तकलीफ, टीबी और यहां तक कि कैंसर तक का कारण बनते हैं।

एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत में एक मेगावाट बिजली के उत्पादन में 1800 टन फ्लाई ऐश(राख) निकलती है। इस राख में लगभग 20 प्रतिशत मोटी राख (बालू जैसी) और 80 प्रतिशत फ्लाई ऐश रहती है। भारत में राख उपयोग का स्तर 1991-1992 में मात्र 0.3 मिलियन टन की अल्प मात्रा से बढ़ कर 2010-11 में 26.03 मिलियन टन पहुंच गया था। एक अनुमान के मुताबिक भारत में फ्लाई ऐश का उत्पादन 2016 में लगभग 120 मिलियन मीट्रिक टन था, जो 2020 तक 150 मिलियन मीट्रिक टन तक हो सकता है।

ग्रामीणों के बताया की रिहन्द बांध में ऐश डैम की राख के मिल जाने से पीने का पानी दूषित हो गया है, बांध होने से आस पास से इलाकों में जल स्तर तो बढ़ा है लेकिन यह पानी दूषित है और इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला गया तो लोगो को दमा, फेफड़े में तकलीफ, टीबी और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों से जूझना पड़ेगा।

चीयर्स डेस्क 

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