पीने वालों को ही ज़्यादा काटते हैं मच्छर !

शराब उपभोक्ता के साथ समाज, पुलिस, सरकार और परिवार ही नहीं, मच्छर भी बहुत बुरा सलूक करते हैं। यानी मच्छर भी उन लोगों को खूब काटते हैं जो शराब पिए होते हैं। इसका कारण इथेनाॅल है जिसकी गंध को मच्छर पसंद करते हैं।
शराब से निकलने वाला एथेनॉल ही मच्छरों को पिए हुए व्यक्ति की तरफ खींचता है। जब कोई व्यक्ति शराब पीता है तो उसके पसीने के साथ थोड़ी तादाद में एथेनॉल निकलता है। मच्छर इसकी गंध से इंसान तक पहुंच जाते हैं। 2010 में बुर्किना फासो में हुई एक रिसर्च भी इसी नतीजे पर पहुंची थी कि शराब या बीयर पीने के बाद मच्छरों के काटने की आशंका बढ़ जाती है। एथेनॉल से मच्छरों को इशारा मिलता है कि आस पास भोजन उपलब्ध है।

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अमेरिकी की जर्नल ऑफ मॉस्क्विटो कंट्रोल एसोसिएशन की 2002 की रिपोर्ट के अनुसार शराब पिए हुए व्यक्ति को मच्छर का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि ये जर्नल एथेनाॅल की सुगंध की बात के अलावा कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहता है कि मच्छर पियक्कड़ों की तरफ वास्तव में क्यों खिंचे चले आते हैं।

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इस रिपोर्ट के अनुसार एक स्वाभाविक और वैज्ञानिक कारण ये है कि मच्छरों को मनुष्य के होने का एहसास दो केमिकल से होता है। एक तो है कार्बन डाई ऑक्साइड जिसे सांस छोड़ते वक़्त सभी मनुष्य निकालते हैं। दूसरा ऑक्टानॉल, जिसे मशरूम एल्कोहल भी कहते हैं। क्योंकि मशरूम का स्वाद इसी केमिकल की वजह से आता है। ये केमिकल हमारे शरीर में शराब पीने के बाद बनने लगता है।

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एक अनुमान ये भी है कि कुछ मच्छर खुद ही नशेड़ी होते हैं और पियक्कड़ों की तलाश में रहते हैं, अपने नशे के लिए। हालांकि इस बारे में रिसर्च कम हुई है कि क्या शराबी का ख़ून पीने से मच्छरों को भी नशा होता है। फिलाडेल्फिया की पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी की शिक्षिका और मच्छरों की अमेरिकी जानकार तान्या का मानना है कि शराब पिए हुए व्यक्ति का खून पीने से मच्छरों को भी नशा हो जाता है. वजह ये कि खून में अल्कोहल की मात्रा इतनी नहीं होती है कि नशा हो जाए।

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अमेरिका की ही नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के अनुसार किसी व्यक्ति ने 10 पेग शराब पी है, तो उसके खून में अल्कोहल की मात्रा 0.2 प्रतिशत हो जाती है। इस स्थिति में उस पर शराब का बेहद मामूली असर होगा तो ये कोई बहुत बड़ा कारण या आधार तो बनता नहीं है शराब पिए व्यक्ति को मच्छरों के हमले का।

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लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम की एरिका के मुताबिक मच्छरों को नशा होने का तो नहीं पता, पर मधुमक्खियां अक्सर एल्कोहल की वजह से नशे की शिकार हो जाती हैं। उस दौरान उनका बर्ताव बदल जाता है। वो मस्ती करना शुरू कर देती हैं। अपना साथी चुनने में ज्यादा मशक़्क़त नहीं करती हैं। ज्यादा एल्कोहल ले लेने के बाद मनुष्य की ही तरह मक्खियां भी होश खो बैठती हैं।

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मच्छर भी सड़ते हुए फल से रस चूसना पसंद करते हैं जो अल्कोहल में या तो तब्दील हो चुका होता है या हो रहा होता है। सिर्फ मादा मच्छर ही खून पीती है। इसकी वजह ये है कि उन्हें अंडे देने के लिए जो प्रोटीन चाहिए होता है, वो खून से हासिल होता है। वैसे नर और मादा, दोनों ही मच्छर फलों और फूलों का रस पीते हैं, ताकि उन्हें एनर्जी मिले। शराब पीने वाले इंसान, मच्छरों को पसंद आना एक दिलचस्प बात है। वैसे, बहुत से इंसानों के जीन में भी कुछ ऐसा होता है कि मच्छर उन्हें अपना शिकार ज्यादा बनाते हैं। दुनिया की कुल आबादी के पांचवें हिस्से के जीन में ऐसी बात होती है कि मच्छर उनकी तरफ ज्यादा खिंचे चले आते हैं।

चीयर्स डेस्क

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