पीने लायक नहीं सतलुज का पानी

सतलुज का पानी इस लायक नहीं बचा है कि उसे सिंचाई के लिए प्रयोग किया जा सके। पहले इसी नदी का पानी पीने के लिए इस्तेमाल होता था। इस नदी के आस पास बसे इलाकों में पीने के पानी की जैसी समस्या अब है, इससे पहले कभी नहीं रही। इसका कारण है कि हिमाचल प्रदेश में अवैज्ञानिक तरीके से बिजली परियोजनाओं का निर्माण जो पर्यावरण संतुलन और मानव जीवन के लिए घातक साबित हो रहा है। परियोजना के निर्माण से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि जल प्रदूषण के साथ भूमि में प्रदूषण का सामान्य स्तर भी गड़बड़ाने लगा है। इसका खुलासा एक शोध से हुआ है, जिसकी रिपोर्ट नौ से 13 सितंबर तक जर्मनी के बर्लिन में होने वाले यंग अर्थ साइंटिस्ट कांग्रेस में पेश की जानी है।

राष्ट्रीय जीबी पंत संस्थान मौहल के वरिष्ठ वैज्ञानिक भीम चंद ने 2013 से लेकर 2018 तक किन्नौर जिले की शौंगटोंग और रामपुर बिजली परियोजना के प्रभावित क्षेत्र पर शोध किया है। रिपोर्ट में परियोजना निर्माण के दौरान बढ़े वायु एवं जल प्रदूषण को दर्शाया है। वायु में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम पाई गई है, जिसे सेहत के लिए काफी घातक माना जाता है।

इसी प्रकार सतलुज के पानी की गुणवत्ता दिन पर दिन घटती जा रही है। नदी के पानी को मापने की विधि टरबीडीटी मीटर 30 एनटीयू (नफेलोमीटर टरबीडीटी यूनिट) से 150 एनटीयू तक पाई गई, जबकि पर्यावरण की दृष्टि से इसका पैमाना अधिकतम दस होना चाहिए। एनटीयू का स्तर असाधारण होने से सतलुज नदी का पानी पीने और सिंचाई लायक नहीं बचा है। इस पानी से सिंचाई करने पर फसल पैदावार घटेगी और यदि इसे पीने के लिए इस्तेमाल किया गया तो यह कई गंभीर बीमारियों को जनम दे देगा।

इसी तरह से भूमि प्रदूषण में नाइट्रोजन की मात्रा 130 से 210 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पाई गई, जो कृषि-बागवानी के लिए नुकसानदायक है। फसल के लिए भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा 224 से अधिक होनी चाहिए। यह परियोजना फिलहाल निर्माणाधीन है। वैज्ञानिक भीम चंद ने 412 मेगावाट की रामपुर जल विद्युत परियोजना के प्रभावित क्षेत्रों का शोध किया है। इस परियोजना के आस पास के इलाके में पीने के पानी की समस्या जिस प्रकार बढ़ती जा रही है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वहां बिना ट्रीटमेंट के पानी पीने वाला नहीं बचेगा। आरओ सिस्टम की मांग इस क्षेत्र में बढ़ने लगेगी और प्राकृृतिक छटा बिखेरने वाला यह क्षेत्र अप्राकृृतिक रूप से पानी का उत्पादन करने लगेगा।

चीयर्स डेस्क

loading...
Close
Close