इन इलाकों में ‘पानी’ की वजह से नहीं है ‘पीने का पानी’

यूपी के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं जिसमें देश के प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है। वाराणसी में गंगा और जमुना दोनों में जलस्तर बढ़ता चला जा रहा है। मंगलवार को तो जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ 16 सेंटीमीटर दूर रह गया था। इस भयानक बाढ़ की वजह से इन इलाकों के बहुत से लोगो को पलायन करना पड़ रहा है। पलायन तेज होने के बीच राहत शिविरों में संसाधन के नाम पर कुछ भी नहीं है। प्रशासन के दावे के उलट पीड़ित पीने के पानी तो बच्चे दूध के लिए तरस रहे हैं। सफाई और खानपान के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है।

लगातार बढ़ रहा गंगा का जलस्तर

गंगा किनारे शीतला घाट की ओर से शहर में प्रवेश करने के बाद बाढ़ के पानी का फैलाव दशाश्‍वमेध के चितरंजन पार्क तक हो गया है। नाली के रास्‍ते आगे गोदौलिया की ओर बढ़ने से बाजार के दुकानदारों में दहशत फैल रही है। वहीं शहरी इलाके में सामनेघाट, नगवां, साकेतनगर, भगवानपुर तक का इलाका बाढ़ के पानी में डूब गया है। इन इलाकों की दो दर्जन कॉ‍लोनियों में रहने वाले कैद होकर रह गए हैं।

प्रभारी मंत्री ने देखी पेयजल की व्यवस्था 

सूबे के नगर विकास एवं जनपद के प्रभारी मंत्री आशुतोष टंडन ने मंगलवार को कमिश्‍नर दीपक अग्रवाल और जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह के साथ बाढ़ प्रभावित सरैयां और कोनिया का दौरा किया। सरैयां प्राथमिक विद्यालय व मदरसों में स्‍थापित बाढ़ राहत कैंप में रह रहे 100 परिवारों के करीब चार सौ लोगों से खाना, पेयजल तथा दवाइयों के बारे में पूछताछ की। उन्‍होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत शिविरों में आवश्‍यक सामग्री की कमी ना होने पाए। वहीं घर बंद कर राहत शिविरों में गए लोगों के सामान की सुरक्षा के लिए रात के समय नावों से पुलिस गश्‍त के भी निर्देश दिए।

जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यवस्था कर रखी है लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी है।  इतनी बड़ी संख्या में हो रहे पलायन को संभालने  के लिए सरकार को और व्यवस्था करने की जरूरत है।

चीयर्स डेस्क

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