पिछले 10 वर्षो में तेजी से गिरा यूपी का भूजल स्तर

यूपी में पिछले 10 वर्षों में 718 ब्लॉकों में भूजल स्तर काफी गिरा है इससे न सिर्फ खेती किसानी पर फर्क पड़ा है बल्कि पीने के पानी की समस्या भी पैदा हो गयी है और यह सिलसिला लगातार जारी है। इससे चिंतित राज्य सरकार ने भूगर्भ जल विभाग को भूजल एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए नियमावली बनाने के निर्देश दिए हैं। नियमावली पर इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। प्रदेश में कुल 820 ब्लॉक हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में अतिदोेहित, क्रिटिकल व सेमी क्रिटिकल ब्लॉकों की संख्या क्रमशः 113, 59 व 45 थी, जो अब क्रमशः 82, 47 व 151 हो गई है। अतिदोहित व क्रिटिकल श्रेणी के ब्लॉकों की संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन सेमी क्रिटिकल श्रेणी के विकास खंडों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।

भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अतिदोहित व क्रिटिकल श्रेणी के ब्लॉकों की संख्या में कमी स्थिति में सुधार से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के गणना के मानक में बदलाव करने से हुई है। अगर पूर्व निर्धारित मानकों के आधार पर यह जांच होती तो वर्तमान में भी अतिदोहित व क्रिटिकल श्रेणी के ब्लॉकों में वर्ष 2013 के मुकाबले 15-20 प्रतिशत की वृद्धि हुई होती। नए मानकों के हिसाब से भी 151 और ब्लॉकों पर खतरा बढ़ रहा है।

सुरक्षित, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल व अति दोहित श्रेणी में बांटे जाने का आधार

पूर्व में स्टेज ऑफ डवलपमेंट के साथ भूगर्भ जल में गिरावट के स्तर के आधार पर ब्लॉकों को सेफ, सेमी क्रिटिकल, क्रिटिकल और अति दोहित श्रेणी में रखा जाता था। 90 फीसदी से ज्यादा जल निकासी और प्री या पोस्ट मानसून (दोनों में से एक ) सीजन में से ज्यादा गिरावट पर उस ब्लॉक को क्रिटिकल श्रेणी में रखा जाता था। 90 फीसदी से ज्यादा जल निकासी और प्री मानसून व पोस्ट मानसून (दोनों में) सीजन में भूगर्भ जल में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा गिरावट होने पर अतिदोहित (डार्क) श्रेणी में रखा जाता था। 70-90 प्रतिशत जल निकासी और प्री या पोस्ट मानसून सीजन में से किसी एक में भूजलस्तर में 20 सेमी. से ज्यादा गिरावट होने पर उस ब्लॉक को सेमी क्रिटिकल श्रणी में रखा जाता था।

अगर एक साल में प्रति 100 लीटर भूगर्भ जल रिचार्जिंग पर 70 लीटर पानी निकाला जाता है तो उस ब्लॉक को सुरक्षित श्रेणी में रखा जाता हैं। 70 से 90 फीसदी तक निकासी को क्रिटिकल, 90-100 प्रतिशत निकासी पर क्रिटिकल और 100 फीसदी से अधिक निकासी पर संबंधित ब्लॉक को अतिदोहित श्रेणी में रखा जाता है। निकासी की इस मात्रा को स्टेज ऑफ डबलपमेंट (विकास का स्तर) कहते हैं। नए प्रावधान में भूगर्भ जल का इस्तेमाल ही उस ब्लॉक की श्रेणी जारी करने का आधार होता है।

चीयर्स डेस्क 

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