नदियों में प्रदुषण को रोकने में यूपी सरकार नाकाम

यूपी सरकार को पश्चिम यूपी की नदियों में प्रदूषण से निपटने के उचित वैकल्पिक प्रणालियां बनाने में नाकाम बताते हुए एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को प्रभावित गांवों में तीन सप्ताह के अंदर पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 148 गांवों में केवल 41 गांवों में पानी की आपूर्ति होती है। पीठ ने कहा कि बाकी गांवों में कई स्तरों पर काम अधूरा है।

एनजीटी ने यूपी के मुख्य सचिव को सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद जिलों के प्रभावित निवासियों को पीने के पानी की उपलब्धता के मुद्दे को व्यक्तिगत रूप से देखने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार संवेदनशील मुद्दों से निपटने के लिए उचित वैकल्पिक प्रणाली बनाने में भी नाकाम रही है। इस पृष्ठभूमि में पूरी प्रक्रिया पर तब तक मुख्य सचिव की नजर रहने की जरूरत है जब तक वैकल्पिक प्रामाणिक प्रणाली नहीं स्थापित हो जाए और उचित प्रभावी कदम नहीं उठाये जाएं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘यूपी के मुख्य सचिव तीन सप्ताह के अंदर मामले को देखें, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें और पूरे मामले को नौकरशाही की प्रक्रियाओं में उलझने देने के बजाय ऐसे गांवों में पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए और अधिक कार्रवाई कराएं।’’

अगली सुनवाई से पहले एनजीटी ने मुख्य सचिव से ईमेल के जरिये अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है । एनजीटी ने कहा, ‘‘अगर मुख्य सचिव यह सुनिश्चित नहीं कर पाए, तो हमारे पास उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब करने के बजाय कोई विकल्प नहीं होगा।’’ मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। एनजीओ दोआबा पर्यावरण समिति ने याचिका दाखिल की थी जिसमें काली, कृष्णा और हिंडन नदियों में प्रदूषण की बात कही गयी थी।

चीयर्स डेस्क 

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