‘देश एकजुट होकर काम करे तो जरूरत से ज्यादा पानी होगा’

अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय को मिलाकर एक नया रूप दे दिया- जल शक्ति मंत्रालय। इसकी कमान जोधपुर से जीतकर आए सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंपी गई है। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव को शिकस्त देने वाले शेखावत की चुनावी जीत जितनी बड़ी है, उतनी ही अहम है उनको दी गई जिम्मेदारी। गजेंद्र सिंह शेखावत से जल संकट से जुड़े मुद्दे पर बातचीत के प्रमुख अंश…

देश इस समय पानी से जुड़े कई संकटों का सामना कर रहा है। ऐसे में हम अगले पांच वर्षों में जल शक्ति मंत्रालय से क्या उम्मीद कर सकते हैं?

भारत में दुनिया की 18 फीसदी आबादी रहती है। विश्व के 18 प्रतिशत पशु भी यहीं हैं। इसकी तुलना में हमारे पास पीने लायक पानी कुल विश्व का केवल 4 फीसदी है। हमारे अधिकतर जलस्रोत प्रदूषित हैं। जलवायु परिवर्तन ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। कुछ हिस्से लगातार बारिश झेल रहे हैं और कई जगह सूखा है। अभी तक पानी से जुड़े तमाम मामले विभिन्न मंत्रालयों के तहत आते थे। इस मंत्रालय का गठन पहली पहलकदमी है। दूसरी पहल के तहत पानी बचाने और भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पीने और खेती की हमारी 65 फीसदी जरूरतें भूगर्भ जल से पूरी होती हैं। इस संसाधन को फिर से भरने के लिए पीएम ने सभी गांवों के सरपंचों को पत्र लिखा है। ‘मन की बात’ में भी उन्होंने जल संरक्षण की जरूरत बताई है। सभी राज्यों के पानी के मामलों को देखने वाले मंत्रियों के साथ हमने अपने स्तर पर बैठक की है, साथ ही जल शक्ति अभियान लॉन्च किया है। जल विज्ञानी, जॉइंट सेक्रेटरी और इंजीनियरों की टीम उन जिलों में जाएगी, जहां ग्राउंड वॉटर की स्थिति भयावह है। डीएम को प्रोग्राम का नोडल ऑफिसर बनाया गया है। वे हर जिले में जागरूकता फैलाएंगे और प्लान तैयार करेंगे।

क्या ऐसी कोई योजना है, जिससे किसानों को लगातार पानी की आपूर्ति होती रहे?

हमने सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड से ऐक्विफर मैपिंग पर काम जल्द पूरा करने को कहा है। मार्च 2020 के अंत तक हमारे पास इसका एक 3डी डायग्राम होगा। तब तक जल संकट से जूझ रहे जिलों में ऐक्विफर रिचार्ज के लिए योजना बना ली जाएगी।

नितिन गडकरी ने कहा है कि जब वह जल संसाधन मंत्री थे तब नदियों से जुड़े प्रॉजेक्ट 30 फीसदी पूरे हुए थे। इसका मतलब है कि अभी काफी काम बाकी है। इन्हें पूरा करने के लिए आपकी क्या योजना है?

गंगा सफाई को लेकर हमारे नजरिये में थोड़ा बदलाव आया है। केवल गंगा के बजाय हमने उसकी सभी सहायक नदियों, उप-नदियों और शाखाओं को भी शामिल कर लिया है, ताकि पूरे नदी बेसिन को कवर किया जा सके। उदाहरण के लिए गंगा से यमुना, यमुना से चंबल और आगे ऐसे ही। पूरे बेसिन को साफ करने का विचार है। यमुना को साफ किए बिना गंगा को स्वच्छ नहीं रख सकते। हम सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का नेटवर्क बनाने पर काम कर रहे हैं। दिल्ली में एक बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने वाला है।

नीति आयोग ने हाल में कहा कि भूगर्भ जल का हद से ज्यादा दोहन देश के सामने खड़े ऐतिहासिक जल संकट के कारणों में से एक है। बाद में आपने कहा कि पानी की समस्या इतनी भी भयानक नहीं है…

ऐसा नहीं है कि पानी के मामले में यह साल असाधारण रूप से खराब है। देश के किसी न किसी हिस्से में जल संकट रहता ही है। मैं राजस्थान से आता हूं, जिसने पिछले 70 में से 60 वर्ष सूखा देखा है, लेकिन जल संरक्षण की पुरानी तकनीक और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग ने हमें बचाए रखा। बचपन में हम छत पर जमा होने वाले बारिश के पानी को पीने में इस्तेमाल करते थे। इस तरह जमा पानी साल भर चलता था। अब हमारे जलाशयों की स्थिति भी खराब होने से चुनौती बढ़ गई है। अगर पूरा देश एक साथ आकर एक दिशा में काम करे तो समस्या का समाधान हो सकता है। मैं यह बात इतने भरोसे से इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बरसात के रूप में हमें 4000 अरब घन मीटर पानी मिलता है। इसमें से हम केवल 1000 इस्तेमाल कर पाते हैं। यदि हम 2000 अरब घन मीटर पानी बचा लें तो देश के पास जरूरत से अधिक जल होगा। अगले कई वर्षों के लिए हम सुरक्षित हो जाएंगे। हमारे सामने इजरायल का उदाहरण है, जिसने जल संकट को एक अवसर में बदल दिया। वहां भारत की तुलना में एक चौथाई बारिश होती है, लेकिन जल के मामले में वे सुरक्षित हैं।

सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत हर घर में पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का वादा किया है। आप इसे कैसे पूरा करेंगे?

पहले नल से जल योजना को 2030 तक पूरा करना था, लेकिन फिर पीएम ने वादा किया कि 2024 तक यह लक्ष्य हासिल करेंगे। हमने सभी राज्यों के सीएम और संबंधित अधिकारियों से प्लान बनाने को कहा है। इसमें यह भी ध्यान देना है कि जलस्रोत लंबे समय तक चल सकने वाला हो ताकि सप्लाई बनी रहे। दूसरा पहलू यह है कि घरेलू इस्तेमाल का 70 फीसदी पानी बेकार हो जाता है। हम इसे साफ करके फिर से इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।

गजेंद्र सिंह शेखावत

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