देशी नहीं तो कच्ची से काम चलाने पर मजबूर ग्रामीण

यूपी में देशी शराब की खपत अंग्रेजी से अधिक है, क्योंकि यूपी की 60 फीसदी से अधिक आबादी ग्रामीण है और जब जब इस ग्रामीण आबादी को देशी शराब की खपत नहीं मिली है तब तब गांवों में अवैध शराब की आमद बढ़ जाती है। इसी के निर्माण में कभी कभी एथेनॉल, मिथिनाॅल बन जाता है जाता है तो ये  शराब जहरीली होकर सैकड़ों लोगों की जान ले लेती है। जैसे कि अभी फरवरी में कुशीनगर, सहारनपुर में और मार्च में कानपुर में हुआ। फरवरी में ही असम में डेढ़ सौ लोग जहरीली शराब से मर गए।

देशी शराब की उपलब्धता में कमी होने या कर देेने से गांवों में कच्ची शराब की मांग तेजी से बढ़ती है। ये खेल नया नहीं है, हर साल के शुरु में इसी तरह सप्लाई में दिक्कतें आती हैं। यहां पर ये बात ध्यान देने की है कि जहरीली शराब से मौतों की घटनाएं साल के शुरु में ही क्यों होती हैं। लखनऊ के मलिहाबाद में 2015 में 50 से ऊपर लोग जहरीली शराब से मरे थे। इस साल फरवरी में कुशीनगर, सहारनपुर  और उत्तराखंड में 114 लोग मरे। फरवरी में ही असम में जहरीली शराब से 150 से अधिक की मौत हो गई। मार्च के पहले सप्ताह में कानपुर के घाटमपुर में दो लोग मरे।

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देशी शराब की किल्लत लखनऊ और उसके आस पास के जनपदों में इतनी अधिक हो गई है कि कई दुकानदारों ने लखनऊ के मोहिबुल्लापुर स्थित शराब डिपो में हंगामा किया। जिला आबकारी अधिकारी भी वहां पहुंचे और दुकानदारों को शराब की आपूर्ति करवाने का आश्वासन देकर मामला शांत करवाया। लेकिन दुकानदार इतने गुस्से में थे कि इस दौरान दुकानदारों से उनकी झड़प भी हो गई।

राजधानी लखनऊ में देशी शराब की 506 दुकानें हैं। इन दुकानों पर 300 से 400 पेटी देशी शराब की सप्लाई है। इस साल के लिए दुकानदारों ने सिक्युरिटी मनी के रूप में 22.5 लाख रुपये भी जमा कर दिए हैं, लेकिन उनको सिर्फ 25 प्रतिशत माल की ही सप्लाई की जा रही है। इसकी वजह से उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है। इनका आरोप था जिला आबकारी अधिकारी जान बूझकर देशी शराब की खेप नहीं मंगवा रहे हैं।

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लखनऊ शराब असोसिएशन के महामंत्री कन्हैया लाल मौर्या ने चीयर्स डाॅट काॅम से बात करते हुए इस सम्बंध में बताया कि देशी शराब की आपूर्ति न होने से दुकानदारों को रोज लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है।

विंडीज की मांग

मामला देशी शराब के ब्रांड विडीज़ को लेकर है, इसी ब्रांड को लेकर ये बवाला शुरू हुआ। विडीज़ ब्रांड सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। यही वो ब्रांड है जिसकी मांग सबसे अधिक लगातार बनी रहती है। लेकिन पिछले कुछ माह से लखनऊ में इसकी सप्लाई ठप है, कई दिनों से कुछ दुकानदार इसी शराब की सप्लाई की मांग के लिए गोदाम पर जा कर प्रर्दशन कर रहे थे। दुकानदारों का कहना है कि विडीज़ के अलावा भी अन्य ब्रांडो की देशी शराब की आपूर्ति भी नही मिल पा रही है, जिससे शराब उपभोक्ताओं में रोष है।

जमानत जब्त

शराब व्यापारियों का ये भी कहना है कि 15 मार्च के बाद क्लोजिंग हो जाएगी। उसके बाद सिक्युरिटी मनी भी जब्त कर ली जाएगी। जब आपूर्ति ही 25 प्रतिशत की हो रही है तो सिक्युरिटी मनी के हिसाब से बिक्री ही नहीं हो पाएगी। ऐसे में लाखों रुपए का नुकसान होना तय है। आबकारी विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन न हो पाने से भी दिक्कतें आ रही हैं। दुकानदारों का यह भी आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी जानबूझकर देशी शराब नहीं मंगवा रहे हैं। इन दुकानदारों में से कई ने नाम न छापने की शर्त पर इस बात को स्वीकार किया कि देशी की आपूर्ति न होने की दशा में कच्ची शराब की मांग बढ़ जाती है।

चीयर्स डेस्क

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