देवताओं वाली शराब पिया करते थे राही मासूम रज़ा

महाभारत टीवी सीरियल के डाॅयलाग लिख कर सुर्खियां बटोरने वाले विख्यात लेखक राही मासूम रज़ा अपने जमाने की मशहूर शराब ’काॅगनेक’ पिया करते थे। विख्यात फ्रेंच लेखक, कवि विक्टर ह्यूगो ने काॅगनेक को ’देवताओं की शराब’ की संज्ञा दी है। राही मासूम रज़ा ने महाभारत लिखने से पहले और बाद में भी दर्जनों फिल्मों के डाॅयलाग और स्क्रिप्ट लिखे। राही मासूम रज़ा बाॅलीवुड में काफी सम्मानित और प्रतिष्ठित लेखक थे।

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बीआर चोपड़ा ने पहली बार जब उनसे महाभारत टीवी सीरियल की स्क्रिप्ट और संवाद लिखने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। लेकिन तब तक बात प्रेस तक पहुंच चुकी थी कि राही लिखेंगे महाभारत के संवाद। खबर छपी तो चोपड़ा साहब को गुस्से से भरे ढेरों ऐसे पत्र मिले जिनमें लिखा था कि राही मासूूम रज़ा के अलवा उन्हें  कोई और नहीं मिल रहा है जो महाभारत के संवाद लिखे।

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बीआर.चोपड़ा ने वो सभी पत्र राही साहब को भेज दिए। पत्रों को पढ़ कर राही साहब को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने बीआर चोपड़ा को फोन कर कहा कि अब तो वही लिखेंगे महाभारत के संवाद। फोन पर उन्होंने ये भी कहा कि वो असली गंगा पुत्र हैं, उनके अलावा कोई और लिख ही नहीं सकता महाभारत के संवाद।

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राही साहब के भांजे, सैयद आसिफ जाह बाॅलीवुड में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं और कई फिल्मों के निर्माता हैं, बताते हैं कि राही साहब बड़े जबर्दस्त आदमी थे। वह लिखते थे तो लिखते ही रहते थे। दिन हो या रात उन पर असर नहीं पड़ता था। इसी तरह उनके पीने पर भी दिन रात का कोई असर नहीं पड़ता था।

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आसिफ जाह के मुताबिक राही साहब का घर हर किसी के लिए खुला रहता था और हर समय खाना बनता रहता था, कोई न कोई खाने पीने आता ही रहता था। आसिफ बताते हैं कि राही साहब की बेगम ने उन्हें बताया था कि उनके किचन का खर्च औसतन 30 हजार रुपए माहाना है। आसिफ जाह ये याद करते हुए हैरत से कहते हैं कि ये बात नब्बे के दशक के शुरुआत की है।

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राही साहब अपनी मनपसंद शराब काॅगनेक को अपने साथ ही रखते थे, जब जरूरत समझते थोड़ी सी निकालते और पी लेते। उनके पीने का तरीका बेहद शालीन था और फिल्मी दुनिया में जहां शराब पीना बिल्कुल सामान्य सा है, आखिर तक कोई जान नहीं पाया कि राही साहब भी नियमित पीने वालों में से हैं।

चीयर्स डेस्क


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