दिल्ली में अब मिलेगी फ्रेश बियर

गुरुग्राम और फरीदाबाद की तरह फ्रेश बियर अब दिल्ली में भी उपलब्ध होगी , क्योंकि माइक्रोब्रेवरीज को रेस्तरां और बार में खोलने को अंततः दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा मंजूरी मिल गयी है । माइक्रोब्रेवरी के कार्यान्वयन के लिए नई नीति या प्रावधान पहले विभिन्न कारणों से अधिसूचित नहीं किया जा सका लेकिन अब अधिकारियों के मुताबिक डीडीए ने इसे मंजूरी दी है । सूत्रों के मुताबिक, “रेस्तरां, होटल या क्लबों को प्रति दिन 500 लीटर क्षमता तक की माइक्रोब्रेवरी स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन साथ ही रेस्तरां, बार और होटलों को माइक्रोब्रेवरी स्थापित करने से पहले उत्पाद विभाग से आपत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) निकासी / लाइसेंस प्राप्त करना पड़ेगा। “माइक्रोब्रेवरीज, जिन्हें आर्गेनिक बीयर भी कहा जाता है, को विभिन्न फल जैसे स्ट्रॉबेरी, सेब, अंगूर के साथ तैयार किया जाता है। स्ट्रॉबेरी, सेब, अंगूर को स्वस्थ पेय भी माना जाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि माइक्रोब्रेवरीज पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए स्वास्थवर्धक है, क्योंकि इसमें अल्कोहल, रासायनिक और संरक्षक नहीं होते हैं, विशेष रूप से ग्लिसरीन का उपयोग जो कि पैक और बियर कैन में किया जाता है। इसके अलावा, यह व्हिस्की और अन्य हार्ड ड्रिंक से अच्छा और सुरक्षित पेय होगा जो मोटापे को भी कम करेगा।

वर्तमान में, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआईए) में स्थापित एकमात्र मैक्रोब्रेवेरी है। “दिल्ली सरकार ने तीन साल पहले दिल्ली में ब्रेवेरी स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी , लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका क्योंकि ब्रेवरीज को दिल्ली की मास्टर प्लान (एमपीडी) 2021 में उद्योगों की ‘निषिद्ध / नकारात्मक’ सूची के तहत सूचीबद्ध किया गया था। एक अधिकारी ने कहा, आगे की सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद , दिल्ली के लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को ताजा निर्मित बियर का आनंद मिलेगा। एक अधिकारी ने कहा, “इसके अलावा, फ्रेश बियर पैक की गई बीयर से सस्ती होगी क्योंकि इसमें पैकेजिंग और परिवहन शुल्क शामिल नहीं है।

“एक बियर विशेषज्ञ ने कहा “जर्मनी में, गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे प्रतिदिन ताजा बियर का गिलास लें क्योंकि यह बहुत पौष्टिक है। लेकिन बोतलों में रसायनों का प्रयोग किया जाता है जो फैटी और हानिकारक है।हरियाणा सरकार ने 2010 में अपने शहर गुरुग्राम में सबसे पहले माइक्रोब्रेवरीज को स्थापित किया। वर्तमान में, गुरुग्राम में 45 माइक्रोब्रेवरीज हैं और वे सालाना हरियाणा सरकार के उत्पाद विभाग में करीब 320 करोड़ रुपये का योगदान देती हैं। “दिल्ली गुरुग्राम से पांच गुना बड़ा है और कोई कल्पना कर सकता है कि यह सरकार के लिए कितना राजस्व उत्पन्न करेगा। एक बार जब माइक्रोब्रेवरी शहर में स्थापित हो जाएगी, तो सरकार प्रति वर्ष लगभग 700-800 करोड़ रुपये कि आय होगी। साथ ही, यह पर्यटन के लिए भी बढ़िया है क्योंकि विदेश से आने वाले लोग ऐसे उत्पादों की तलाश में रहते हैं। विशेषज्ञों ने कहा, दिल्ली में इस सुविधा कि कमी थी लेकिन अंततः इसे मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि जब माइक्रोब्रेवरीज शुरू हो जाएंगी तब डेरी फार्मों के साथ इनका अनुबंध हो जाएगा क्योंकि इस बियर से उत्पादित अपशिष्ट गाय के लिए पौष्टिक है, विशेष रूप से गर्भवती और स्तनपान करने वाली गायों के लिए पौष्टिक होता है। वर्तमान में, माइक्रोब्रेवरी सुविधाएं गुरुग्राम, मुंबई, गोवा, बेंगलुरू, फरीदाबाद और चंडीगढ़ में उपलब्ध हैं। ताजा निर्मित बीयर की लागत `50-60 के बीच होगी, जबकि पैक की गई बीयर की लागत` 80-100 के आसपास होगी।

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