दस साल के लिए बचा पीने का पानी

यूपी के मुरादाबाद में पीने के पानी का गंभीर संकट है,और एक अनुमान के अनुसार अगले दस साल तक के लिए ही पीने का पानी बचा है। पेयजल संकट पर यह तस्वीर जल शक्ति अभियान में हुई कार्यशाला में पेश की गई। जल संरक्षण और जल को दूषित होने से बचाने के लिए अभियान के उप सचिव और मुरादाबाद ब्लॉक के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह ने पीने के लिए पानी बचाने के लिए लोगों को समझने और समझाने की नसीहत दी।

मुरादाबाद शहर के अलावा अन्य क्षेत्रो में भी पानी का संकट छाया हुआ है, आने वाले समय में स्थिति नहीं सुधरी तो यह हालात होंगे कि जमीन के नीचे सबकुछ मिलेगा मगर पीने का पानी नहीं। देश में भी पीने के पानी की कितनी किल्लत है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद देश के प्रधानमंत्री को इसके लिए आगे आना पड़ा। नदी, तालाब में पानी होना काफी नहीं है बल्कि उसका उपयोग है या नहीं यह जरूरी है।

प्रधानमंत्री भी इस मुहिम के लिए प्रतिनिधित्व करने को मजबूर है तो इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है। हालांकि देश ही नहीं अन्य देशों में भी जल संकट है। चेन्नई जैसी जगह में पानी पांच-तीन फुट में भी मिल रहा है पर उसे पी नहीं सकते, न वह किसी का काम का है। बुंदेलखंड में पीने के पानी के लिए त्राहि त्राहि  मची है, लोग पांच किमी दूर से पानी लाते है।

यूपी के एटा में तीन साल से लगातार पानी बचाने का काम हो रहा है। पानी की कमी से तमाम जिले जूझ रहे है। हमें सरकार की तरफ देखने की बजाय खुद पानी के महत्व को समझना होगा । जितना पानी निकाल रहे है उतना डाले भी। यह पानी भी साफ हो और तरीके से किया जाएं। यह गंभीर समस्या है जितना जल्दी हम समझेंगे, उतना अच्छा होगा।

चीयर्स डेस्क 

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