त्यौहार ओवररेटिंग और शराब

आबकारी आयुक्त के सख्त निर्देश के बावजूद दीपावली के त्यौहार नजदीक आते ही शराब के दुकानों पर ओवेरटिंग शुरू हो गई है।  यह खेल नया नहीं है।  इसमें गोदाम से लेकर दुकान तक सब मिले हुए होते हैं।  दीपावली के त्यौहार में गोदाम इंचार्ज भी उन्ही ब्रांड की सेल बढ़ाने में लगे रहते हैं जिनसे उन्हें अच्छे गिफ्ट मिलते हैं। दुकानदारों को उन्ही ब्रांड की शराब को खरीदने को मजबूर करते हैं अगर कोई दुकानदार कोई दूसरी ब्रांड की शराब मांगे तो माल अभी आया नहीं है बोल कर टाल देते हैं।  दुकानदार को भी गोदाम इंचार्ज के मन की शराब लेनी पड़ती है और यूपी के सभी जिलों में यह खेल चल रहा है।

इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए शराब के दुकानदार 20 -30 रूपए बढ़ा कर बेचना शुरू कर देते हैं इससे जहां सुरा प्रेमियों को अपना शौक पूरा करने के लिए जेब अधिक ढीली करनी पड़ती है, वहीं राजस्व पर भी असर पड़ता है।  तमाम दुकानदार और सेल्समैन विभिन्न ब्रांड की कमी बताकर ग्राहकों से निर्धारित से ज्यादा मूल्य वसूलते हैं। अंग्रेजी, देशी और बीयर पर 10 रुपये से 30 रुपये तक ज्यादा वसूली की जाती है।

विभागीय सूत्रों का दावा है कि ओवररेटिंग से वसूली गई रकम का कमीशन संबंधित आबकारी निरीक्षक, सिपाही और प्रवर्तन दल के लोगों को पहुंचता है। इसके चलते आबकारी अधिकारी ओवररेटिंग व डायल्यूशन के बारे में सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने रहते हैं। ओवेरटिंग का दौर त्योहारों के समय बढ़ जाता है लेकिन यह खेल पूरे साल चलता है। यूपी में शराब उपभोक्ताओं से जुड़ा कोई संगठन नहीं है जो इस बात को प्रशाशन के सामने रखे जबकि राजस्व का सब से बड़ा हिस्सा शराब से ही आता है।  ओवर रेटिंग के सम्बन्ध में जब भी किसी अधिकारी से बात करो तो  वो जांच का आश्वासन दे कर मामला शांत कर देते हैं लेकिन खेल चलता ही रहता है।

चीयर्स डेस्क

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