तय होगा शराब का कोटा, कोटा तय होने से छोटे व्यापारी बाहर होंगे

अंग्रेजी शराब और बीयर में सरकार नई आबकारी नीति के तहत दुकानदारों का कोटा पहली बार तय करने जा रही है। शराब की बिक्री के आधार पर नई आबकारी नीति के तहत दुकानों का कोटा तय किया जाएगा। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार इस महीने नई आबकारी नीति तैयार करने की कोशिश में है। संभावना यह भी है कि अगले आबकारी वर्ष के लिए शराब और बीयर की दुकानों के नवीनीकरण और नए सिरे से आवंटन की प्रक्रिया भी इस महीने शुरू हो जाएगी।

शासन ने नई प्रक्रिया के लिए सभी जिलों के आबकारी अधिकारियों से दुकानों पर शराब की बिक्री के अलावा उससे जुड़ा पूरा ब्योरा मंगलवार तक विभाग की वेबसाइट पर भेजने के निर्देश दिए हैं। विक्रेता अभी तक जितनी शराब बेचते थे, उसके अनुसार विभाग को लाइसेंस फीस और प्रतिभूति शुल्क के रूप में राजस्व देते थे। विभागीय अधिकारियों की मानें तो नई आबकारी नीति में अब शराब व बीयर के दुकानदारों का कोटा तय कर दिया जाएगा। अंग्रेजी दुकानों के लिए यह कोटा पिछले साल हुई बिक्री से चालीस प्रतिशत अधिक का और बीयर की दुकान के लिए पिछले साल हुई बिक्री से तीस प्रतिशत अधिक होगा। 2018-19 की आबकारी नीति के मुताबिक जिस अंग्रेजी शराब की दुकान पर पिछले साल की अपेक्षा 40 प्रतिशत और बीयर की दुकान पर 30 प्रतिशत अधिक बिक्री होती है तो विभाग उनका नवीनीकरण करेगा। अब नवीनीकरण के साथ उसे अगले साल का कोटा भी दे दिया जाएगा।

अंग्रेजी शराब और बीयर का कोटा तय किए जाने की कवायद का विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को यूपी लिकर असोसिएशन (लखनऊ शराब असोसिएशन) के पदाधिकारियों ने बैठक कर राज्य सरकार की इस तैयारी का विरोध किया और आंदोलन की रणनीति तैयार की। असोसिएशन के अध्यक्ष सरदार एसपी सिंह ने कहा कि उनकी दुकानों का आगामी वर्ष 2019-20 के लिए बिना शर्त नवीनीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष शराब व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा रहा है। नई नीति लागू होने के बाद शुरुआती तीन महीनों(अप्रैल, मई और जून) में सरकार फुटकर दुकानदारों को अंग्रेजी शराब और बीयर मुहैया ही नहीं करवा पाई थी।

महामंत्री कन्हैया लाल मौर्य ने कहा कि सरकार जो राजस्व बढ़ने का दावा कर रहे है, वह विशेष जोन खत्म होने के कारण है। विशेष जोन के जिलों को छोड़ कर बाकी सभी जिलों के व्याापारी माल न मिलने के कारण नुकसान में हैं। ऐसे में अंग्रेजी शराब और बीयर का कोटा तय होने से प्रतिभूति राशि में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे कारण छोटे दुकानदार बाहर हो जाएंगे और बड़े ग्रुपों का शराब कारोबार पर एक बार फिर कब्जा हो जाएगा।

चीयर्स डेस्क

 

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