झारखंड के गांव जहाँ शराब को कोई हाथ भी नहीं लगाता

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के कई गांव ऐसे हैं जहां शराब से लोगों के स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान से लेकर घरों के बर्बाद होने तक के खतरों के प्रति इन गांवों के लोग इतने सचेत रहे हैं कि गांववालों ने आपसी सहमति के आधार पर दशकों से यहां शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है। शराब का सेवन करने पर यहां पंचायत ने दंड का भी प्रावधान कर रखा है। इतना ही नहीं कुछ गांवों में धार्मिक भावना इतनी प्रबल है कि वहां के लोगों ने आज तक शराब को हाथ नहीं लगाया है। सुशिक्षित समाज की नजीर पेश कर रहे ये गांव समाज को नई राह दिखा रहे हैं।

शराब से किया तौबा तो बदल गई देवघर की तस्वीर

जमशेदपुर शहर से 10 किलोमीटर दूर देवघर गांव में गांववालों ने 25 साल से शराबबंदी लागू कर रखी है। इस गांव में संताल, भूमिज और मुंडा जाति के लोग निवास करते हैं। गांव की जनसंख्या करीब एक हजार है। अधिकतर लोग किसान हैं। सालों पहले शराब से लोगों की बर्बादी देखकर गांव के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेमोरियल क्लब और बिदु चांदान महिला समिति, सरस्वती एभेन गांवता और हिर्ला जाहेर आयो महिला समिति ने संयुक्त रूप से बैठक कर गांव में शराब बेचने व पीने पर प्रतिबंध लगा दिया।

पंचायत के पूर्व सरपंच संग्राम सोरेन कहते हैं कि पहले गांव में शराब हावी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेकर शराबबंदी लागू कर दी। ग्राम प्रधान सिमल मुर्मू कहते हैं कि 1992 से यहां शराब पर प्रतिबंध है। देवघर निवासी वृधान सोरेन ने बताया कि शराबबंदी के बाद गांव का विकास तीव्र गति से होने लगा। युवा शिक्षा के साथ खेल के क्षेत्र में आगे जाने लगे। विभिन्न विभागों में युवाओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर नौकरी हासिल की। सभी खुशहाल हैं।

चीयर्स डेस्क 

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