जानिए, शाम को ही क्यों लगती है तलब शराब की

शराब की तलब शाम होते ही क्यों लग जाती है। पूरी दुनिया में शराब पीने की घड़ी शाम को ही आती है। सभी सभ्य लोग शाम को ही पीने का महूरत निकालते हैं, शाम या देर शाम या फिर रात यानी कि सूर्य देवता के अस्त हो जाने के बाद। भारत के पहाड़ों पर तो कहावत ही चल पड़ी है कि सूर्य अस्त पहाड़ मस्त। मैदान हो या पहाड़ या समुद्री इलाका, शराब पीने के लिए दिन का नहीं शाम का समय ही उचित माना गया है।

प्राचीन भारत में जब ऋषियों और मुनियों ने इसे सोम रस के रूप में स्वीकारा तब भी शाम को ही इसका सेवन करने की बात की और इसी समय को इसके लिए सबसे उपयुक्त कहा गया। लेकिन क्या इसके कोई वैज्ञानिक कारण हैं। विज्ञान कहता है कि इसकी एक रसायनिक प्रक्रिया है कि शाम होते ही शराब की तलब लग जाती है।

जैसे ही दिन समाप्त होने को होता है और सूरज पश्चिम में डूब रहा होता है तो क्या आपके अंदर एक ग्लास व्हिस्की पीने की तीव्र इच्छा उठती है, अगर ऐसा है तो यह मस्तिष्क की प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम की उत्तेजना के कारण हो सकता है। एक नई रिसर्च में मस्तिष्क की प्रतिरक्षा प्रणाली और रात में शराब पीने की प्रेरणा के बीच के संबंध पता चला है कि शरीर की जैविक प्रक्रिया मादक पदार्थो से संबंधित व्यवहार के कारण मस्तिष्क द्वारा उत्पन्न संकेतों को प्रभावित करती है और यह प्रभाव आमतौर पर शाम या अंधेरे के वक्त देखने को मिलते हैं।

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ एडीलेड में हाल ही में हुए अध्ययन में कहा गया है कि ‘शराब दुनिया का सबसे अधिक खपत वाला मादक पदार्थ है और ऐसे जैविक तंत्रों को समझने की अधिक जरूरत है जो शराब पीने की हमारी आवश्यकता को प्रेरित करते हैं।’ शोध के दौरान रिसर्चरों ने नैलट्रीक्सोन नामक दवा के द्वारा चूहों के मस्तिष्क के प्रतिरक्षा रिसेप्टर को अवरुद्ध कर दिया था। नैलट्रीक्सोन के सेवन पर चूहों में शराब पीने के व्यवहार में महत्वपूर्ण कमी पाई गई, खासकर तब जब मादक पदार्थ संबंधी व्यवहार अधिक देखने को मिलता है।

इससे निष्कर्ष निकाला गया कि मस्तिष्क की प्रतिरक्षा प्रणाली के एक विशिष्ट भाग को अवरुद्ध करने से वास्तव में शाम के वक्त शराब पीने के चूहों द्वारा प्रेरित होने की प्रक्रिया में कमी आई। यह रिसर्च पेपर ब्रेन, बिहेवियर एंड इम्यूनिटी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

चीयर्स डेस्क


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