जल संरक्षण सीखिए इस स्कूल से

गुजरात के तक्षशिला विद्यालय ने जल संक्षरण के लिए बेहतरीन तरकीब निकाली है। विद्यालय के  प्रिंसिपल ने विद्यालय के खेल के मैदान में बड़े मटकेनुमा टंकी बनवा रखी है जिसमे वो बारिश का पानी स्टोर करते हैं ।  विद्यालय के शिक्षक परेश प्रजापति बताते हैं कि पहले उन्हें हर माह तीन से चार टैंकर पानी मंगवाना पड़ता था जिसका खर्च 15 से 16 सौ रुपए तक आ जाता था। लेकिन जब से उन्होंने एक लाख लीटर क्षमता के चार वाटर टैंक बनाएं हैं, तब से हम बारिश का पानी इसी में स्टोर कर लेते हैं  और फिर इसका यूज़ करते हैं। आए दिन जल संकट का ख़तरा भयानक रूप ले रहा है। इन सभी सोचों के साथ हमने तय किया कि क्यों न बारिश के पानी का स्टोर करके इसका उपयोग स्कूल में पीने के पानी के रुप में किया जाए।

परेश प्रजापति ने बताया कि उन्होंने इसी सोच के साथ विद्यालय के खेल मैदान में मटके के आकार के 25 हजार लीटर के चार मटके बनाए। मटके को जमीन के अंदर बनाया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके निर्माण में न तो लोहे की सरिया का उपयोग हुआ हैऔर ना ही आरसीसी के तहत बनाया गया है। इसका निर्माण केवल ईट से किया गया है और इसके अन्दर और बाहर प्लास्टर किया गया है, जिसके बाद इसे मिट्टी से ढंक दिया गया है।

गुजरात के इस स्कूल से सीखिए जल संरक्षण, बचा लेता है बारिश का एक लाख लीटर पानी

बरसात के पानी को  संचित करने के लिए छत से पाईप लाया गया है जो एक चेम्बर में जाता है और उस चेम्बर से पाइप उस मटके से जुड़ा हुआ है। चेम्बर की बनावट कुछ इस तरह से की गई हैं कि जब बरसात के पानी की जरूरत हो तभी वह मटके में जाता है नहीं तो वह बाहर चला जाता है। पानी साफ जाए इसके लिए एक फिल्टर लगाया गया है, जिससे पानी छन कर जाता है। जब बरसात होती है तो 10 से 15 मिनट तक उसके पानी को संग्रह नही किया जाता है जब छत की गंदगी निकल जाती है और उसकी फर्श को साफ कर दिया जाता है उसके बाद पानी मटके में जाता है। उस मटके के पानी को मोटर के ज़रिये छत पर लगे टैंक में ले जाया जाता है और उसे नलों के माध्यम से पीने के उपयोग में लिया जाता है।

वे आगे कहते हैं, “इसमें एक लाख लीटर पानी जमा हो सकता है जिसका उपयोग हम पीने के लिए दस से ग्यारह महीने तक कर सकते हैं,  सबसे बड़ी बात ये है कि जिस पानी का उपयोग पहले हम करते थे आज उस पानी का उपयोग दूसरे लोग कर सकते हैं। आज जिस तरह से यह सकरात्मक कदम इस विद्यालय ने उठाया है वैसे ही और दूसरे विद्यालयों  को उठाने की जरूरत है।”

गुजरात जहां पर पीने के पानी की इतनी दिक्कते हैं।  वहां पर जल संरक्षण का यह तरीका बहुत ही उम्दा है। गुजरात ही नहीं अपितु अन्य प्रदेश की सरकारों को भी जल सरंक्षण के इस तरीके को अपनाना चाहिए और लोगों को भी जोड़ना चाहिए। जिससे बरसात के पानी का सद्पयोग किया जा सकेगा और जल संकट को भी बहुत हद तक कम किया जा सके।

चीयर्स डेस्क

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