जलावर्धन योजना का नहीं मिल पा रहा लोगों को लाभ

मध्यप्रदेश में श्योपुर के विजयपुर नगर में पीने के पानी की समस्या से निपटने के लिए तीन साल पहले 13 करोड़ रुपए की शुरू की गई जलावर्धन योजना का काम कछुआ गति से चलने से नागरिकों को इसका लाभ मिलना अभी भी दूर की कोड़ी साबित हो रहा है। अनुबंध के अनुसार कंपनी को 40 माह में काम पूरा करके देना था। इस लिहाज से अभी तक 90 फीसद काम हो जाना चाहिए था, लेकिन मौके पर सिर्फ 10 प्रतिशत काम ही हुआ है। ठेकेदार की लेटलतिफी से नगरवासी दूषित पानी पीने पर मजबूर बने हुए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के अनुसार विजयपुर नगर में लोगों की प्यास बुझाने और हर वर्ष गहराने वाले गंभीर पेयजल संकट से हमेशा के लिए निजात दिलाने के उद्देश्य से जलावर्धन योजना स्वीकृत की गई थी। नागरिकों की प्यास बुझाने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना को तीन साल पहले शुरू भी कर दिया गया। इस योजना के शुरू होने से विजयपुरवासियों को उम्मीद बंधी थी की उन्हे अब गर्मियों में पीने के पानी के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। नदी के माध्यम से नलों में सप्लाई होने वाले दूषित पानी से भी निजात मिल जाएगी, लेकिन निर्माण एजेंसी की कछुआ गति के चलते यह सपना पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। निर्माण एजेंसी ने मौके पर सिर्फ टंकी बनाकर छोड़ी है वह भी अधूरी है। अभी टंकी निर्माण को पूरा करने के साथ पाइप लाइन बिछाने सहित महत्पूर्ण काम बाकी है।

विजयपुर में नगरपरिषद द्वारा जो पानी पीने के लिए सप्लाई किया जा रहा है वह दूषित होकर पीने योग्य नहीं है। इससे अधिकतर लोग पीने का पानी निजी एजेंसियों से खरीद रहे हैं। नगरपरिषद उदासीनता से विजयपुर में पीने के पानी का व्यापार खूब फल-फूल रहा है। नगरपरिषद ने पीने के पानी के लिए नदी में जो कुआ खुदवाया है उसमें मटमेला दूषित पानी भरा हुआ है यही पानी नलों के माध्यम से घरों में सप्लाई हो रहा है। लोग इस पानी को कपड़े धोने और दूसरे काम में खर्च कर रहे हैं। पीने का पानी खरीद रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसा गरीब वर्ग भी है जो पीने का पानी खरीद नहीं पा रहा है ऐसे लोग उसी दूषित पानी को पी रहे हैं।

जब भी गर्मियों में पेयजल संकट गहराता है तभी नगरपरिषद को कुआ खोदने की याद आती है। हर वर्ष नगरपरिषद सूख चुकी क्वांरी नदी में कुआ खोदकर नागरिकों को पानी पिलाने का काम करती है। बरसात शुरू होते ही यह कुआ पानी के साथ मिट्टी और बजरी से पूर जाता है। अगले साल फिर यही कवायद की जाती है। पानी पिलाने के लिए नगरपरिषद हर वर्ष इसी तरह जुगाड़ करती है। जलावर्धन योजना के शुरू होने से लोगों को उम्मीद बंधी थी कि, अब नगरवासियों को पीने के पानी के लिए न तो जुगाड़ के कुए पर निर्भर रहना पड़ेगा और नहीं पीने का पानी खरीदेंगे। निर्माण एजेंसी की लेटलतीफी से नगरवासियों की सभी उम्मीदे धूमिल हो गई हैं।

चीयर्स डेस्क 

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