चुनाव प्रचार में मंच पर ही पी फिराक़ गोरखपुरी ने शराब

शराब किसी को चुनाव जिता सकती है, या हरा सकती है, ये बात सुनने में अटपटी लगती है और समझा ये जाता है कि वोटरों को अपने पक्ष में लुभाने के लिए शराब का इस्तेमाल किया जाता है। ये बात एक हद तक सही भी है। लेकिन भारत के चुनावों में एक ऐसी घटना भी हुई है जब प्रत्याशियों ने शराब पीने और न पीने का एक दूसरे पर आरोप लगाकर चुनाव की जीत हार तय कर दी।

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घटना गोरखपुर की है, आजाद भारत के पहले आम चुनाव 1951 में सम्पन्न हुए थे। पहले चुनाव थे तो राजनीति उतनी नहीं थी जितनी अब होती है। यूपी की गोरखपुर दक्षिण सीट वीआईपी थी। यहां कांग्रेस के सिंहासन सिंह, मजदूर प्रजा पार्टी से मशहूर शायर रघुपति सहाय ‘फिराक़ गोरखपुरी‘ और हिंदू महासभा से गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत दिग्विजयनाथ के बीच मुकाबला था।

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चुनाव प्रचार के दौरान एक ऐसी घटना हुई जिससे फिराक गोरखपुरी खुद तो हार गए लेकिन उन्होंने महंत दिग्विजयनाथ को भी जीतने नहीं दिया। इसका सीधा फायदा सिंहासन सिंह को मिला जो भारी मतों से जीत गए। ये घटना शराब को लेकर हुई थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिराक गोरखपुरी के शिष्य और आकाशवाणी के लिए कई साक्षात्कार लेने वाले साहित्यकार रवींन्द्र श्रीवास्तव उर्फ जुगानी भाई वर्ष 1951 की उस चुनावी घटना को याद करते हुए बताते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान उरूवा बाजार की सभा में महंत दिग्विजयनाथ ने फिराक गोरखपुरी पर शराब पीने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह शायर हैं, शायरी करते हैं और शराब पीते हैं।

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इसके जवाब में चंद घंटे बाद ही फिराक गोरखपुरी ने उसी मैदान में एक जनसभा की और शराब की बोतल उपस्थित जन मानस के सामने खोलकर सभी के सामने दो तीन घूंट गटक लिए। फिर बोलना शुरु किया और दलील रखी कि सभी लोग बंद कमरे में शराब पीते हैं, एक मैं हूं जो खुलेआम पीता हूं। इसलिए पीने की बात पर किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में ये भी कहा कि जनता को यदि नहीं पीने वाले को वोट देना है तो तो फिर कांग्रेस के सिंहासन सिंह को वोट दे दें क्योंकि वह शराब नहीं पीते हैं।

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फिराक़ गोरखपुरी के उस चुनाव भाषण का नतीजा ये निकला कि फिराक़ गोरखपुरी की बात घर कर गई और लोगों ने वास्तव में फिराक के कहे अनुसार सिंहासन सिंह को ही सार्वाधिक वोट दे दिए, और जिस फिराक के कहने पर वोट दिया था, उसे सिर्फ 9586 वोट मिले। नतीजा ये कि फिराक गोरखपुरी की जमानत जब्त हो गई। यहां से कांग्रेस के सिंहासन सिंह ने 57,450 मतों से जीत हासिल की और द्वितीय स्थान पर महंत दिग्विजयनाथ को 25,678 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।

चीयर्स डेस्क

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