चुनाव और अप्रैल, चल रहा अंग्रेजी में देशी का खेल

चुनाव के दिन और ऊपर से मार्च अप्रैल की क्लोजिंग जिसमें पूरे यूपी की दुकानों पर मनचाहे ब्रांड गायब। ऐसे में शराब उपभोक्ता का शोषण होना ही है। शराब की कमी और उस पर चुनाव का काम। इस समस्या का तोड़ भाई लोगों ने ये निकाला कि अंग्रेजी में देशी को मिला मिला कर पीने और पिलाने लगे। टेस्ट भी बदल गया और नशा भी तेज़ हो गया। देशी की झार भी नहीं झेलनी पड़ी।

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पीने वालों तक तो ठीक था, लेकिन यही फार्मूला शराब के लाइसेंसी दुकानदारों ने भी अपना लिया और चमकाने लगे धंधा। इसी में गड़बड़ हो गई और धर लिए गए। पिछले दिनों सीतापुर जिले के खैराबाद थाने मंे पुलिस के हत्थे इसी तरह के दुकानदार चढ़ गए। पुलिस ने चैपहिया वाहन सवार दो शराब माफिया के पास से 765 पौव्वा देशी और 17 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की है। खैराबाद एसओ का दावा है कि आरोपित दो देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानों का माल लाकर मिलावट कर लंबे समय से सप्लाई कर रहे थे। पकड़ा गया एक आरोपी शराब की दुकान पर आपूर्ति का काम करता है।

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चुनाव के दौरान सख्ती, कड़ी चैकसी और धरपकड़ के बाद भी अंग्रेजी शराब में नकली का खेल लगातार जारी है। लखनऊ के मोहनलाल गंज और बख्शी का तालाब क्षेत्रों में इसी तरह की शराब बिकने की सूचना है। लखीमपुर जनपद के मैकलगंज क्षेत्र में भी अंग्रेजी में देशी की मिलावट के समाचार प्राप्त हुए हैं। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और बिजनौर में भी अंग्रेेजी में देशी की मिलावट का खेल चलने के बारे में सूचना है कि वहां इस प्रकार की शराब के दाम अलग से निर्धारित कर दिए गए हैं। पीने वालों को पता है कि कौन सा ठेका कितनी मिलावट कर रहा है। कौन सा शुद्ध है और किस ठेके पर मिलावट चल रही है।

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अंग्रेजी में देशी मिलाने की बात पर आबकारी विभाग मौन है। आबकारी विभाग के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि यह समस्या नई नहीं है। प्रायः इस प्रकार की शिकायतें मिलती रहती हैं और जब तब पकड़ में भी आती हैं। लेकिन इन दिनों चूंकि चुनाव के कारण सख्ती ज्यादा है तो ऐसी शराब जहां तहां पकड़ी जा रही है।

चीयर्स डेस्क

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