चुनावी घोषणा के साथ ही पूर्वांचल में लगे अवैध शराब को पंख

लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूर्वांचल में अवैध शराब कारोबार को पंख लगना शुरू हो गया है। दूसरे प्रदेशों से भी यह अवैध शराब मंगवाई जा रही है। चुनाव के दौरान प्रत्याशी और उनके समर्थक धड़ल्ले से इसका प्रयोेग करेंगे। पूर्वांचल के हर जिले में चुनाव के दौरान करोड़ों रूपये का यह काला कारोबार हर बार की तरह इस बार भी होने की पूरी संभावना है। पूर्वांचल में आई अवैैध शराब की यह खेप तमाम लोगों की होली भी बदरंग कर सकती है। अवैध शराब से हुई मौतों के कारण प्रशासनिक स्तर पर कुछ सख्ती जरूर है और कमोबेश हर जिले में कारोबारी अरेेस्ट भी किए जा रहे हैं। बावजूद इसके धड़ल्ले के साथ पूरे पूर्वांचल में यह अवैध शराब बिक रही है।

पूर्वांचल में अवैध शराब की खेप उतरना शुरू हो गई है। अंग्रेजी शराब का यह अवैध कारोबार पूर्वांचल में यूपी के कुछ जिलों के साथ-साथ सीधे हरियाणा से जुड़ा हुआ है। यूपी के जिन जिलों से नकली शराब की खेप पूर्वांचल में आती है उन जिलों में प्रमुख रूप से मिर्जापुर व सोेनभद्र जिले शामिल हैं। देेहाती क्षेत्र की कुछ लाइसेन्सी अंग्रेजी शराब की दुकानों से भी इस नकली शराब की बिक्री की जाती है। इस अवैध कारोबार में पुलिस व आबकारी के लोग भी मिले हुए होते हैं। यही वजह है कि कभी भी नकली शराब व अधिक दाम पर शराब बेचने वाले लाइसेन्सी दुकानों केे खिलाफ कोेई भी कार्रवाई नहीं की जाती है।

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पूर्वांचल में देशी शराब का सबसे बड़ा हब आजमगढ़ में है। आजमगढ़ का देवारा इलाका हमेशा भूख व गरीबी से लड़ता रहता है। हर मौसम यहां आपदा ही लेकर आती है। बरसात के दिनों में घाघरा की कटान हजारों परिवारों को बेघर कर देती है। साथ ही नदी की कटान के कारण देवारा का भूगोल हर साल बदल जाता है। यही वजह है कि यहां के लोग कच्चा मकान व घास-फूस की मंडई ही बनाकर रहते हैं। यह कच्चे मकान व मंडई बरसात के दौरान बह जाते हैं। बरसात का पानी हटने के बाद यह लोग फिर नये सिरे से अपना आशियाना बनाते हैं। साथ ही बरसात का पानी हटने केे साथ ही इनको संक्रामक बीमारियां झेलनी पड़ती है औैर सांप-बिच्छू जैसे खतरनाक जीव जन्तुओं के प्रकोप का सामना करना पड़ता है। गर्मी के दिनों मेें एक मंड़ई में आग लगने पर पूरी की पूरी बस्ती ही साफ हो जाती है। नदी का किनारा होने के कारण ठण्ड का मौसम तो इन अभावग्रस्त लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता ही है। यही वजह है कि यहां के गरीब व भोेले-भाले लोग थोड़े से मुनाफे के लिए बड़ेे अवैध शराब कारोबारियों का मोहरा बन जाते हैं और इस इलाके में धड़ल्ले के साथ यह अवैध शराब बनाकर पूरे पूर्वांचल में इसकी सप्लाई की जाती है।

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देवारा में बनने वाली इस अवैध कच्ची शराब की खासियत यह है कि एक पाउच महज 10 रूपये में मिल जाता है। इस एक पाउच में पानी मिलाकर कई गिलास शराब बना ली जाती है। इसको बनाने वाले किसी ग्राहक को सीधे महज पांच ही रूपए में एक पाउच बेच देते हैं। एक ही पाउच से कई शराबियों के होठों की प्यास बुझायी जा सकती है। यही वजह है कि पूर्वांचल के जिलों में आजमगढ़ के पूर्वांचल में बनी इस शराब की काफी मांग है। देवारा की बनी यही शराब पीकर ही अभी कुछ समय पहले देवरांचल केे ही करीब 86 लोगों की मौत हो गयी थी। बावजूद इसके यह कारोबार अभी भी धड़ल्ले के साथ यहां चल रहा है।

आज़मगढ़ का देवरा कच्ची शराब का गढ़

कच्ची शराब पूर्वांचल के लोेगों की होली बदरंग कर सकती है। वजह यह कि होेली के मद्देनजर आजमगढ़ के देवारा से कच्ची शराब की खेप पूरे पूर्वांचल में भेजी जा रही है। यहां की बनी कच्ची शराब पीकर अभी कुछ समय पहले ही करीब 86 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत बेचने वाले यह चालाक लोग गरीबों के बीच मौत बेचने का खेल अभी भी जारी रखे हुए हैं। इन मौतों के बाद कुछ लोगों पर कानूनी शिकंजा जरूर कसा था। अभी पश्चिमी यूपी में कच्ची शराब से मौत होने के बाद भी कुछ लोग अरेस्ट हुए थे। साथ ही पूरे पूर्वांचल में अभी भी छोटे शराब कारोबारियों को अरेस्ट किया जा रहा है, मगर बड़े कारोबारियों पर पुलिस व आबकारी जल्दी हाथ नहीं डालती। कहीं भी शराब से कोई बड़ा हादसा होने पर छोटे कारोबारी अरेस्ट होेते हैं और बड़े कारोबारी जल्दी ही अपने गुर्गों को जमानत पर छुड़ा लेते हैं। ऐसे में जेल से छूटनेे के बाद वह फिर अपना अवैध कारोबार शुरू कर देते हैं। इन स्थितियों के बीच आजमगढ़ के देवरांचल में बनी यह कच्ची शराब पूर्वांचल के तमाम लोेगों की होली बदरंग कर सकती है।

आज़मगढ़ से संदीप अस्थाना

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