गंदा पानी पीने से शहर हो रहा बीमार

राजधानी में गंदे पानी की समस्या से आम आदमी जूझ रहा है। अस्पतालों में रोजाना पहुंचने वाले मरीजों में लगभग 20 प्रतिशत लोग गंदा पानी पीने से बीमार होते हैं।बलरामपुर अस्पताल के इमरजेंसी के कुछ चिकित्सकों की मानें तो खदरा, बाजारखाला, हैदरगंज, कैसरबाग, कैंट रोड क्षेत्र से ऐसे लोग अधिक आ रहे हैं।यही हाल अन्य सरकारी अस्पतालों का भी है। दूषित जलापूर्ति का बड़ा कारण पाइप लाइनों की लीकेज है। नाले और नालियों के बीच से गुजरने वाली प्लास्टिक की पाइप लाइनें अक्सर टूट और चिटक जाती हैं। इससे नाली का दूषित पानी घरों में पहुंचने लगता है।

बीमारी का मुख्य कारण गंदे पानी की आपूर्ति 

पानी की गुणवत्ता सही नहीं होने की वजह से घने इलाकों में बीमारी फैलती है और लोग सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर होते हैं। कटरा मकबूलगंज, महाराष्ट्र भवन वाली गली लालकुंआ, आलमबाग का प्रेमनगर, नटखेड़ा, सरदारी खेड़ा, गीतापल्ली, उदयगंज की नई बस्ती, जय नारायण लेन, बाजारखाला का पुराना हैदरगंज इलाका, अमीनाबाद, इंदिरानगर, राजाजीपुरम सी ब्लाक, ई ब्लाक, एफ ब्लाक, सेक्टर 11, 12 और 13, रायबरेली रोड पर तेलीबाग के मोहल्ले राम टोला, भीम टोला, खरिका, मोहारी बाग, रथीन नगर, विकासनगर, खदरा का दीनदयाल नगर, रमबगिया, बड़ी पकरिया, पुरानी बांसमण्डी, फैजुल्लागंज में पानी की समस्या बड़ी हो चुकी है। गन्दा पानी पीने से लोगों को बुखार, उल्टी, दस्त, आंखों का रोग, लीवर की समस्या, पेट से संबंधित रोग, हेपेटाइटिस, जाइंडिस आदि बीमारियां हो रही हैं
अविकसित कालोनियां बनी समस्या

जलकल विभाग के पास सवा चार लाख उपभोक्ता हैं। इसके अलावा शहर के घने इलाकों में और निरंतर बसती जा रही नई कालोनियों में लोग अवैध कनेक्शन करा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है। अविकसित कालोनियों में सबसे अधिक पेयजल समस्या है।सुलतानपुर रोड की कालोनियों को ही लें, तो यहां पर सड़क व नाली भी पक्की नहीं बनी हैं। भारी वाहनों के चलते यहां अक्सर पाइप टूटते हैं। जलकल विभाग और सीएमओ की संयुक्त टीमें जिन इलाकों में गंदे पानी की शिकायतें होती हैं वहां एक-दो महीने ही पानी के सैंपल लेकर उनकी जांच करवाती हैं। गुणवत्ता के लिए यह जांच निरंतर होनी चाहिए।

चीयर्स डेस्क

loading...
Close
Close