खाकी और खद्दर की मिलीभगत का नतीजा है कच्ची शराब का सिंडिकेट

यूपी और उत्तराखंड में कच्ची शराब से 114  से ज्यादा मौत हो जाने के बाद जागने वाली सरकार की नजर पश्चिमी यूपी  के गावों में  परचून की दुकानों पर खुले आम बिक रही कच्ची शराब के घूंट मर कर स्कूल पहुंचने वाले बच्चों पर भी नहीं पड़ती। मेरठ  के एक गांव  में दो महीने पहले स्कूल से इन बच्चों को निकाल  दिया गया था। इस घटना से सबक लिया जाता तो शायद कच्ची शराब का सिंडिकेट तोड़ने के प्रति सोचा जाता और इतनी बड़ी घटना नहीं होती। उत्तराखंड से लेकर मेरठ के खाद्दर इलाके तक  गांव-गांव कच्ची शराब का सिंडिकेट क्या असर डाल रहा है। अब इसका अंदाजा लग गया है। सहारनपुर ,रुड़की ,मुजफ्फरनगर,मेरठ और बिजनोर के खादर इलाके में कच्ची शराब की भट्ठिया लगी है,जंगलो में बड़े पैमाने पर शराब बनाई जा रही हैं फिर इन्हें गांव-गांव सप्लाई किया जा रहा है। इस वीभत्स घटना के बाद प्रशासन की आंख खुल गई है।

कच्ची शराब का यह सबसे बड़ा सिंडिकेट मेरठ के हस्तिनापुर,मुजफ्फरनगर के पुरकाजी ,रुड़की के भगवानपुर और चिलकाना इलाके में है यहां सैकड़ो भट्टियां धधक रही है।गंगा के आसपास के इस इलाके में आबकारी अधिकारी और पुलिस भी जाने की हिम्मत नही जुटा पाती कई बार इन पर हमले भी हुए हैं। 2009 में  एक ऑपरेशन ने इनकी नाक में दम कर दिया था और कुछ महीनों के लिए इस अवैध शराब सिंडिकेट की कमर टूट गई थी अब फिर ये फिर से खड़ा हो गया था। उस दौरान जहरीली शराब पीने से एक दर्जन मौत हो गई थी जिसके बाद मेरठ आईजी जावेद अख्तर के नेतृत्व में यहां सैकड़ो भट्टियां तबाह कर दी गई और इससे जुड़े कारोबारी का क्रेकडाउन हुआ। लेकिन अब यह और अधिक मजबूती से खड़े हो गए हैं ।

ग्रामीणों की माने तो इन्हें आबकारी अधिकारियों और पुलिस का सहयोग है। सहारनपुर में अब तक जितने मरे  हैं, इनमे अधिकतर दलित समाज से आते है। पुलिस ने मंगलवार को रुड़की के अर्जुन नाम के एक युवक को पकड़ने का दावा किया है। सहारनपुर प्रशासन के मुताबिक इसी अर्जुन ने रेक्टिफाइड वाले केमिकल का इस्तेमाल करके 6 ड्रम शराब बनाई थी जिसके 3 ड्रम बेच दिए गए थे इन्ही तीन ड्रम ने कोहराम मचा दिया अगर सभी 6 ड्रम की सप्लाई हो जाती तो हालत दोगुना खराब होते। आबकारी अधिकारियों के मुताबिक रेक्टिफाइएड की मात्रा अधिक होने के कारण यह शराब जहर बन गई।

फोटो कैफ

2008 में मेरठ में भी इसी रेक्टिफाइएड से शराब बनाई गई थी जिसमे 12 की मौत  हुई थी। सहारनपुर के पूर्व विधायक जगपाल सिंह के अनुसार कच्ची शराब का अवैध  कारोबार पुलिस की शह पर चलता है।पुलिस को इससे भारी आमदनी है।कच्ची शराब के सारे कारोबारी पुलिस के संपर्क में रहते हैं। उनकी इस बात की पुष्टि इस बात से हो जाती है कि पुलिस में एक ही रात में अभियान चलाकर 30 लोगो को गिरफ्तार कर 271 लीटर शराब और 350 लीटर लहन बरामद कर लिया।कई थाना क्षेत्रों में यह कार्यवाई हुई। सैकड़ो भट्ठियां ध्वस्त कर दी गई और दर्जनों तस्कर गांव छोड़कर भाग गए। जाहिर है यह कार्यवाई जहरीली शराब से हुई मौते के बाद कि गई जबकि इसकी निरन्तर आवश्यता रहती है।

सहारनपुर का प्रशासनिक अमला इस घटना के बाद पूरी तरह से बैकफुट पर है। इसी बीच एक सनसनीखेज खुलासा पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक और प्रश्नचिन्ह लगाता है। सहारनपुर के नागल थाने के गांव उमाही के इमरान और धनपाल ने दावा किया है गांव में लगातार कच्ची शराब की शिकायत वो पुलिस से कर रहे थे। कुछ महिलाओ ने भी इसकी शिकायत की मगर पुलिस प्रभावित नही हुई।इस गांव से 5 लोगो की मौत हुई है फिलहाल इस थाने के कोतवाल को निलंबित कर दिया गया है। नागल के युवा समाजसेवी शाहवेज गाड़ा के मुताबिक काश पहले जाग जाते तो गांव-गांव कोहराम ना मचता। जानकारी करने पर पता चलता है कि सहारनपुर के 100 से ज्यादा गांवों में 30-30 रुपये में शराब के पैकेट मिल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक बड़गांव के झबिरण, दलेहेड़ी,शिमलना, अंबेहटा चांद,नकुड़ के फतेहपुर जट, रानीपुर, लतीफपुर नैनोता के अर्जुनपुर, अंतरा, भोजपुर में यह शराब बेची जा रही थी।

सहारनपुर/रुड़की/मेरठ से कैफ 

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