क्यों महंगी बिकती है विदेशी शराब

शराब सस्ती हो या महंगी शराब के शौकीनों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कम ही लोग होंगे, जिनके मन में यह सवाल उठा होगा कि आखिर शराब इतनी महंगी क्यों है। तो जान लीजिए की शराब महंगी है नहीं, बल्कि इस पर एक के बाद एक टैक्स लगाकर इसे महंगा बना दिया गया है। पहल इंडिया फाउंडेशन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी शराब की 750 मिलीलीटर की एक बोतल भारत में सिर्फ 350 रुपए में पहुंचती है। लेकिन अलग-अलग चरणों में कई टैक्स लगने के बाद व्यापारी भी इसमें अपना मार्जिन जोड़ते हैं। आखिर में दुकान पर जब एक ग्राहक इसे खरीदता है, तो इसी 750 मिलीलीटर के लिए उसे 4,000 रुपए तक भुगतान करना पड़ता है।

कोई भी कर सकता है आयात

शराब का आयात कोई भी कर सकता है क्यूंकि शराब के आयात पर ओपन जनरल लाइसेंसिंग (ओजीएल) का नियम लागू होता है। मान लिया जाए कि एक व्यक्ति 750 मीलीलीटर शराब के एक पैक का आयात करता है। तो यह पैक भारतीय सीमा में 350 रुपए में प्रवेश करेगा। शराब के आयात पर 150 फीसदी आयात शुल्क लगता है। इसलिए 350 रुपये के शराब पर भारत सरकार को 525 रुपए का शुल्क देना होगा।

आयातक को 900 रुपए का मार्जिन

सीमा शुल्क की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शराब की बोतल दिल्ली में एक्साइज गोदाम पर पहुंचती है। इस चरण में आयातक को दिल्ली के एक्साइज नियमों के मुताबिक इस बोतल के लिए एक लेबल रजिस्टर करना होगा। इसके बाद आयातक 900 रुपए का मार्जिन निकालकर यह बोतल डिस्ट्रीब्यूटर या होलसेलर को बेच देता है ।

65 फीसदी एक्साइज ड्यूटी

आयातक से खरीदी गई शराब की बोतल पर होलसेलर 200-300 रुपए का मार्जिन जोड़ता है। इसके बाद कीमत पर दिल्ली सरकार 65 फीसदी एक्साइज ड्यूटी (आबकारी शुल्क) लेती है।

20 फीसदी वैट

एक्साइज ड्यूटी लगने के बाद बनने वाली कीमत पर रिटेलर 100 रुपए का मार्जिन जोड़ता है। उसके बाद जब यह बोतल बिकती है, तब फिर से इस पर 20 फीसदी का वैट लगता है। इस तरह से बोतल की आखिरी कीमत दिल्ली में 3,500-4,000 रुपए तक पहुंच जाती है। यही कीमत एक ग्राहक अदा करता है। गौर करने वाली बात यह भी है कि जिस 350 रुपए की कीमत पर यह शराब भारत में प्रवेश करता है, उसी में शराब बनाने वाले का मार्जिन भी जुड़ा हुआ होता है।

चीयर्स डेस्क 

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