क्या होता है जब आप पीते हैं RO और पैक्ड बोतल का पानी

आजकल लोगों में आरओ और पैक्ड बोतल के पानी का चलन बढ़ रहा है। वे इसे हाइजिनिक और साफ मानते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये पानी आपके लिए जरा भी सेफ और अच्छा नहीं है। पानी की गुणवत्ता को TDS में मापा जाता है, जो ये बताता है कि पानी में कितने प्रतिशत मिनरल्स है। इन दोनों ही पानी में TDS की मात्रा बहुत कम होती है। ऐसा इसको मीठा रखने के चक्कर में किया जाता है। पानी मीठा लगे इसलिए घर में लगे आरओ का TDS कम रखवाते हैं।

अगर TDS 250-350 के बीच में हो तो इसे बेस्ट माना जाता है। 200-300 की रेंज एवरेज होती है। 150 से कम TDS वाले पानी में आवश्यक मिनरल्स की मात्रा बहुत कम हो जाती है। अक्सर बहुत मीठा लगने वाले पानी का TDS 100 से कम होता है।

ऐसा होने पर ये पानी हार्ट पर बुरा असर डालता है। इससे हार्ट डिसीज होने के चांजेस बढ़ने के साथ ही बालों की ग्रोथ और बॉडी के हार्मोन्स पर बुरा असर होता है। आरओ और बोतल में मिलने वाले पानी का TDS बहुत कम होता है।

पानी जब आरओ से फिल्टर होकर साफ होता है तो उसमें से काफी सारे मिनरल्स निकल जाते हैं।इसी तरह पैक्ड बोतल में पानी भरने से पहले उसे रिवर ऑसमोसिस प्रोसेस के जरिए फिल्टर किया जाता है। जिससे इसके मिनरल्स निकल जाते हैं।

इसलिए देश की हेल्द ऑर्गनाइजेशन के द्वारा इसे मिनरल वाटर कहने पर रोक लगाई गई थी। इसलिए इसे मिनरल वॉटर की जगह पैक्ड ड्रिकिंग वाटर कहा जाता है।

क्या होता है ऐसा असर

साधारण पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं। जो हमारी हड्डियों, पेट और दिमाग के लिए जरूरी होते हैं इनकी वहज से ही पानी पीने से हमारी भूख शांत होती है। बॉटल के पानी में ये मिनरल्स नहीं पाए जाते इसको लगातार पीने से हमारी बॉडी में इन मिनरल्स की कमी होने लगती है।

बॉटल में रखा पानी जब धूप के कॉन्टैक्ट में आता है तो इसमें बॉटल का प्लास्टिक घुलने लगता है। जो बॉडी के हानिकारक होता है और कैंसर और किडनी की बीमारियों की वजह बनता है। बॉटल के पानी में क्लोरेट और क्लोराइट जैसे हानिकारक कैमिकल्स भी मौजूद होते हैं। जो साधारण पानी में बिलकुल नहीं होते।ऐसे पानी की वजह से बालों का गंजापन, चेहरे पर छुर्रियां, पेट से जुड़ी बीमारियां होने लगती हैं।

चीयर्स डेस्क

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